दो आदेश-एक कर्मचारियों के पक्ष में दूसरा खिलाफ
अफसरों की लापरवाही से प्रदेश की अदालतों में हजारों मामले उलझकर रह गए हैं। वे समय पर पेशी पर न तो अदालतों में पेश होते और न ही समय पर जवाब, अपील या दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं। इस वजह से 20-30 साल पुराने केस में लोकल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक लंबित हैं। अब सरकार ने ऐसे अफसरों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का निर्णय लिया है।
एक जानकारी के अनुसार बिलासपुर हाईकोर्ट में वर्तमान में 30 हजार मामले पेंडिंग हैं। इनमें से करीब 20-22 हजार शासन के खिलाफ हैं। राज्य शासन सरकार के विरुद्ध अदालतों में चल रहे प्रकरणों के लिए अफसरों को ओआईसी नियुक्त करता है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपने विभाग से संबंधित मामलों में शासन का पक्ष रखें। कई दफे विभाग की ओर से ओआईसी नियुक्त करने में भी देरी कर दी जाती है। ऐसा भी होता है कि अदालती मामलों में रूचि न रखने वाले अफसरों को यह जिम्मेदारी दी जाती है तो वे इसे हलके में लेने लगते हैं, ताकि किसी और को यह काम सौंप दिया जाए। इस वजह से न सिर्फ शासन का पैसा और वक्त जाया होता है बल्कि अदालतों में लगातार लंबित मामलों की संख्या में इजाफा होता है। दूसरी ओर शासन के खिलाफ केस लगाने वाले फरियादी न्याय की आस में बरसों तक भटकते रहते हैं। कई बार तो उनकी सेवानिवृत्ति तक या मृत्यु होने तक प्रकरणों का फैसला नहीं हो पाता।
अब सरकार ने ऐसे अफसरों पर कार्रवाई करने का फैसला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व शासन के सभी विभागों के सचिवों से कहा कि वे ऐसे मामलों में सख्ती बरते। यह ध्यान रखें कि ओआईसी समय पर कोर्ट में जवाब, अपील या दस्तावेज पेश कर रहे हैं या नहीं। यदि वे ऐसा नहीं करते और लापरवाही बरतते या शिथिलता दिखाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। सचिवों से यह भी कहा गया है कि हर महीने लंबित मामलों की समीक्षा करें। इसकी रिपोर्ट हर महीने के पहले हफ्ते में मुख्य सचिव को भी भेजें।
पौने दो लाख शिक्षाकर्मियों की समस्याएं निपटाने अब सेल
बार-बार पौने दो लाख पंचायत शिक्षकों (शिक्षाकर्मियों) के हड़ताल पर जाने की वजह से शासन तंग आ गया है। उधर शिक्षाकर्मियों का आरोप है कि उनके संवर्ग के काम जिलों व जनपद पंचायतों में तेजी से नहीं निपटाए जाते हैं। हाल ही में उन्हें महीनों तक वेतन नहीं मिला। उनकी शिकायतों को दूर करने व हड़ताल रोकने सरकार ने जिला पंचायतों में सेल बनाने की घोषणा की है। पंचायत विभाग ने जिला पंचायतों व पंचायत संचालनालय में इसके सेल बनाने का ऐलान किया है। जिले में सेल का प्रभारी वहां से वरिष्ठतम परियोजना अधिकारी होगा।
जबकि राज्य स्तर पर सहायक संचालक पंचायत बीएन मिश्रा को यह जिम्मा दिया गया है। सेल का गठन करके इसकी रिपोर्ट शासन ने मांगी है।