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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की जमीन पर बने फ्लैट का विवाद सुलझा, वहीं मिलेगी जमीन

5 वर्ष पहले
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अंतरराज्यीय बस स्टैंड के लिए रावनभाटा में दूधाधारी मठ की 30 एकड़ जमीन के बदले अभनपुर के एक गांव में इससे ज्यादा जमीन दी जा रही है। मठ प्रबंधन इसके लिए राजी हो गया है। कलेक्टर ने मठ को जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है इसलिए मठ की इस जमीन पर राज्यस्तरीय बस स्टैंड बनने का रास्ता साफ हो गया है। जमीन के आवंटन की प्रक्रिया पूरी करने की वजह से 7 फरवरी को होने वाला भूमिपूजन कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया गया है। अब 14 फरवरी को बस स्टैंड के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम होगा।

प्रशासनिक रिपोर्टर| रायपुर

डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के पीछे स्वास्थ्य विभाग की जमीन पर बने गरीबों के फ्लैट का विवाद हल हो गया है। फ्लैट वहीं की बस्ती में रहने वालों को दिए जाएंगे, लेकिन इसके बदले में वहीं डेढ़ एकड़ की जमीन सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को सौंपी जाएगी। जमीन पर अस्पताल प्रबंधन अपनी जरूरत के हिसाब से प्रोजेक्ट लांच करेगा या पार्किंग के लिए उपयोग करेगा।

अस्पताल के पीछे स्थित लोहरापारा और अर्जुन नगर के लोगों को बीएसयूपी के उन फ्लैट में शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन भी तैयार हो गया है। डीकेएस अस्पताल प्रबंधन ने कलेक्टर और राज्य सरकार को इस बात की जानकारी दी थी कि अस्पताल के पीछे जिस जमीन पर बस्तियां बसी है वो डीकेएस की है इसलिए वो जमीन वापस की जाए। पहले इस जमीन पर केंद्र सरकार की योजना के अनुसार वहां मकान बनने थे, जिसे उन्हीं लोगों को आवंटित किया जाना है जो वहां रह रहे हैं। इस जमीन को लेकर कई महीनों तक विवाद की स्थिति बनी रही। सोमवार को नगरीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों की बैठक में तय किया गया कि डीके अस्पताल को उसके बदले जमीन दे दी जाएगी और बस्तियों के लोगों को वहीं शिफ्ट किया जाएगा।



बैठक में उपस्थित कलेक्टर अोपी चौधरी ने बताया कि अस्पताल को जमीन हैंडओवर करने के लिए जल्द ही सभी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

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