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रायगढ़ में जीरो ईयर और सिम्स में 50 मेडिकल सीटें कम होने का खतरा

5 वर्ष पहले
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चार साल पहले शुरू किए गए रायगढ़ मेडिकल काॅलेज में नए सत्र में जीरो ईयर होने यानी एमबीबीएस के पहले साल में एडमिशन नहीं दिये जाने का खतरा हो गया है। इसी तरह, बिलासपुर के सिम्स मेडिकल कॉलेज में भी एमबीबीएस की 150 में 50 सीटें कम होने की आशंका है। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुशंसा की है कि दोनों कॉलेजों को मान्यता नहीं दी जाए। इन कॉलेजों में डॉक्टरों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के आधार पर यह अनुशंसा की गई है। एमसीआई की अनुशंसा के बाद प्रदेश के डीएमई कार्यालय व कॉलेजों में हड़कंप मच गया है।

सूत्रों के अनुसार एमसीआई के पत्र से लग रहा है कि रायगढ़ के इस नए मेडिकल कॉलेज को नए सत्र में मान्यता के लिए परेशानी हो सकती है। अगर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमसीआई की अनुशंसा को मान लिया तो कॉलेज में जीरो ईयर हो जाएगा। यही नहीं सिम्स की 50 सीटों को भी खतरा हो गया है। सिम्स में तीन साल पहले एमबीबीएस की सीटों को 100 से बढ़ाकर 150 किया गया था। इन दोनों ही काॅलेजों में सीटों के हिसाब से डॉक्टरों व सुविधाओं की कमी है।

भर्ती करने होंगे डॉक्टर
दोनों ही मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के लिए डॉक्टरों की भर्ती करनी होगी। यही नहीं इंफ्रास्ट्रक्चर भी डेवलप करना होगा। सिम्स पुराना कॉलेज हैं। यहां लंबे समय से फैकल्टी की कमी बनी हुई है। मरीजों की दी जा रही सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं है। पिछले पांच साल से एमसीआई कॉलेज को मान्यता नहीं दे रही है, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रहमोकरम पर इस कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई चल रही है। रायगढ़ कॉलेज नया है।

शुरू से ही इस कॉलेज की मान्यता पर खतरा मंडराता रहा है, लेकिन अंतत: राज्य सरकार द्वारा अंडर टेकिंग लेने के दावे के बीच मान्यता मिलती रही है।

दोनों के डीन को सूचना
एमसीआई ने दोनों ही मेडिकल कॉलेज के डीन को तलब कर कॉलेज को नए सत्र के लिए मान्यता नहीं देने की बात बता दी है। इससे कॉलेज प्रबंधन सकते में आ गया है। दोनों डीन ने मामले की जानकारी डीएमई कार्यालय को दे दी है। एमसीआई के सख्त रवैये के बाद कॉलेज व डीएमई कार्यालय ने डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। इस संबंध में कॉलेजों को कमियां दूर करने को कहा गया है। ओपीडी में 500 मरीज आने चाहिए, लेकिन केवल 430 मरीज मिले।

डॉक्टरों के अनुसार दिन के हिसाब से मरीज कम ज्यादा होते रहते हैं। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

भर्ती करने होंगे डॉक्टर

दोनों ही मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के लिए डॉक्टरों की भर्ती करनी होगी। यही नहीं इंफ्रास्ट्रक्चर भी डेवलप करना होगा। सिम्स पुराना कॉलेज हैं। यहां लंबे समय से फैकल्टी की कमी बनी हुई है। मरीजों की दी जा रही सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं है। पिछले पांच साल से एमसीआई कॉलेज को मान्यता नहीं दे रही है, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रहमोकरम पर इस कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई चल रही है। रायगढ़ कॉलेज नया है। शुरू से ही इस कॉलेज की मान्यता पर खतरा मंडराता रहा है, लेकिन अंतत: राज्य सरकार द्वारा अंडर टेकिंग लेने के दावे के बीच मान्यता मिलती रही है।

एमसीआई ने जो कमियां बताई हैं, उन्हें दूर करेंगे। डॉक्टरों की भर्ती चल रही है। पैरामेडिकल स्टाफ भी लेंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करेंगे। डॉ. एके चंद्राकर, डीएमई

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