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सीसीटीवी फुटेज में ठिठकी चोरी हुए बच्चे की तलाश

5 वर्ष पहले
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जिला अस्पताल से चार दिन पहले चोरी किए गए तीन दिन के बच्चे की तलाश सीसी कैमरे के फुटेज में अटक गई है। पुलिस ने अस्पताल प्रशासन से बच्चा चोरी होने के तीन-चार दिन पहले के फुटेज मांगे हैं। मंगलवार तक अस्पताल प्रशासन ने फुटेज नहीं सौंपे।

पुलिस सीसी कैमरे के फुटेज के इंतजार में बैठी रही। पुलिस का कहना है कि बच्चे की तलाश में फुटेज अहम क्लू साबित होगा। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई और फुटेज नहीं सौंपे। पुलिस के अाला अफसरों का मानना है कि बच्चा चोरी करने वाली युवती जिस तरह सीधे बच्चे की दादी के पास पहुंची और उन्हें झांसा देकर बच्चा अपनी गोद में लिया, उससे यह साफ है कि वह पहली बार अस्पताल नहीं आई थी।

उसे अच्छी तरह मालूम था कि बच्चे की दादी कौन है और उनकी बहु ने कब पुत्र को जन्म दिया है। चोर गिरोह में शामिल युवती को उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मालूम थी। इस वजह से उसी बच्चे को चोरी करने का फैसला किया गया। इस थ्योरी के आधार पर पुलिस मान रही है कि चोर गिरोह के सदस्यों ने बाकायदा रेकी की है। इसके लिए युवती भी एक-दो या उससे अधिक मर्तबा अस्पताल आई होगी। उस दौरान उसके फुटेज अस्पताल के कैमरे में कैद हुए होंगे। पुलिस का यह भी मानना है कि बच्चा चोरी करने की घटना में अस्पताल का कोई न कोई स्टाफ भी शामिल है। उसी ने बच्चे और उसके परिवार के बारे में पूरी जानकारी चोर गिरोह को दी होगी।

5 फरवरी को प्रथम पेज पर प्रकाशित खबर।

मोती बाग के पास दरगाह के पास से 2011 में चार साल की नादिया का अपहरण किया गया। दो महिलाएं बच्चे को दिन दहाड़े ले गई। आज तक बच्ची नहीं मिल पाई। पुलिस को जांच के दौरान अपहरणकर्ताओं का हुलिया भी पता चला था। लेकिन उस आधार पर भी पुलिस अपहरणकर्ताओं तक नहीं पहुंच पाई।

अभियान चलाकर तलाश
बच्चों के अपहरण और गुम इंसान के लिए अलग से गुम इंसान सेल बनाया गया है। जो बच्चों की तलाश करती है। इसके अलावा क्राइम ब्रांच की भी मदद ली जाती है। ऑपरेशन मुस्कान चलाकर भी बच्चों की तलाश की जा रही है। अस्पताल से गायब बच्चे की तलाश करने की पुलिस पूरी कोशिश कर रही है। बीएन मीणा, एसपी रायपुर

छह बच्चों का अपहरण

सुराग एक भी नहीं
राजधानी से ही पिछले तीन साल में दिन दहाड़े ऐसे ही छोटे बच्चे चोरी किए गए हैं। अब तक एक भी बच्चे का सुराग नहीं मिला। पुलिस ने कुछ दिनों तक बच्चों की तलाश की। बाद में जांच बंद कर दी। अब उनकी फाइलें केवल खानापूर्ति के लिए ही खुली हैं। हालांकि बच्चों के अपहरण के बाद सभी केस खासे चर्चित हुए थे। उसके बाद भी पुलिस ने बच्चों को तलाश करने में रूचि नहीं ली। परिवार वाले अभी भी बच्चों का इंतजार कर रहे है।

उरकुरा इलाके से 2014 से गायब चार साल की पुष्पलता को पुलिस नहीं खोज सकी है। बच्ची की हत्या के संदेह में आसपास के ताला, कुएं तक खंगाले गए। यहां तक आसपास के घरों की तलाशी ली गई। लेकिन बच्ची नहीं मिली। बच्ची के अपहरण की रिपोर्ट खमतराई थाने में दर्ज है।

3
केस
राजेन्द्र नगर इलाके से 2015 से गायब 4 साल की बच्ची अब तक नहीं मिली है। पुलिस ने बच्ची के पिता को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है लेकिन पुलिस बच्ची का शव तक बरामद नहीं कर पाई। बच्ची की मां ने उसके अपहरण की आशंका व्यक्त की थी। अब तक यह मामला अनसुलझा है।

4
केस
आमानाका के आरके मॉल से अप्रैल 2012 को 13 साल का आशीष मिश्रा गायब है। उसके गायब होने के दूसरे दिन ही उसके माता-पिता को एक फोन आया था। उनसे 3 लाख फिरौती की मांग की गई। परिजन पैसे लेकर बताए हुए स्थान पर भी गए। लेकिन आज तक उसका क्लू नहीं मिल पाया।

2
केस
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केस
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