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प्रभु यीशु की तरह नम्र बनें उपवास में उदासी न झलके

5 वर्ष पहले
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रायपुर | मसीही समाज ने बुधवार को भस्म बुधवार मनाया। इसी के साथ चालीस दिनी उपवासकाल की शुरूआत हो गई। चर्चों में विशेष आराधनाएं हुईं जिनमें प्रभु भोज का पवित्र संस्कार भी संपन्न हुआ। अब प्रभु यीशु के पुनरुत्थान पर्व ईस्टर तक समाज में शादी-ब्याह व समारोह नहीं होंगे। संयम काल के पहले दिन सेंट पॉल्स कैथेड्रल में बाइबिलविद ग्रेस जेवियर का प्रवचन हुआ। उन्होंने पवित्र बाइबल का संदर्भ देते हुए प्रभु यीशु की तरह नम्र बनने व क्षमादान तथा पापों से पश्चाताप करने की सीख दी। संचालन पादरी अनिल चौहान ने किया। दुख भोग सप्ताह में जबलपुर के पादरी विपिन लाल मुख्य वक्ता होंगे।





सेंट पॉल्स कैथेड्रल के साथ सेंट जोसफ महागिरजाघर, सेंट मैथ्यूस चर्च, ग्रेस चर्च समेत शहर के चार दर्जनभर चर्चों में भस्म बुधवार पर विशेष प्रार्थनाएं हुईं। गुरुवार से घर-घर प्रार्थना सभाएं शुरू हो रही हैं। 18 फरवरी का दिन मसीही समाज के लिए ऐतिहासिक होगा। 18 फरवरी 1546 को पहली दफे मार्टिन लूथर किंग ने रोमन कैथोलिक समुदाय से अलग प्रोटेस्टेंट क्रिश्चियन शाखा की बुनियाद रखी। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के लिए नियमावली 80 बनाई। इसकी प्रतियां उन्होंने चर्चों में चस्पा करके धार्मिक स्वतंत्रता मांगी। इसके बाद से ही प्रोटेस्टेंट संपूर्ण विश्व में फैले।

0 ये हैं महत्वपूर्ण दिन -

- घरेलू प्रार्थना सभाएं - 11 फरवरी से 19 मार्च तक।

- खजूर रविवार (पाम संडे) - 20 मार्च

- दुखभोग काल का आरंभ - 21 मार्च

- पुण्य गुरुवार (द लास्ट सप्पर) - 24 मार्च

- शुभ शुक्रवार (गुड फ्राइडे) - 25 मार्च

- श्रंखला प्रार्थना दिवस - 26 मार्च

- पुनरूत्थान दिवस (ईस्टर)- 27 मार्च

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