एक स्कूल की तीन शिक्षिकाओं को एटीएम ब्लॉक का झांसा देकर ठगी
डब्लूआरएस के एक निजी स्कूल की प्राचार्य और दो शिक्षिकाएं एक ही दिन थोड़े-थोड़े अंतराल में ऑन लाइन ठगी की शिकार हो गईं। एटीएम ब्लॉक होने का झांसा देकर ठगों ने उनसे खुफिया नंबर पूछा और चंद मिनटों में तीनों के खातों से करीब पौन लाख निकाल लिए। ठगी की रिपोर्ट खमतराई थाने में दर्ज कराई गई है।
पुलिस ने तहकीकात शुरू कर दी है। तीनों शिक्षिकाओं को अलग-अलग नंबरों से फोन आया था। उन नंबरों को जांच के लिए साइबर सेल भेजा गया है। सेल के माध्यम से यह पता चलेगा कि नंबर कहां के हैं और कहां से फोन किया गया था। पुलिस अफसरों ने बताया कि डब्लूआरएस कॉलोनी में टाइनी टाय स्कूल है। ठगी की शिकार पदमिनी विश्वकर्मा उसी स्कूल में प्राचार्य है। उनके पास 9 फरवरी को फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक का मैनेजर बताया और उनसे कहा कि उनका एटीएम ब्लॉक कर दिया गया है। वे हड़बड़ा गईं। उसके बाद कॉल करने वाले ने उनसे कहा कि वे अपने एटीएम के ऊपर लिखा 16 डिजिट का नंबर बताएं।
एटीएम ब्लॉक न हो, इसलिए उन्होंने नंबर बता दिया। करीब एक घंटे बाद उनके मोबाइल पर उनके खाते से 24 हजार निकाले जाने का मैसेज आया। उसके दो घंटे बाद उसी स्कूल की दो अन्य टीचर को फोन आया। उन्हें भी झांसा देकर उनके खाते से 6 हजार और 8 हजार रुपए निकाल लिए गए। पुलिस अफसरों ने बताया कि तीनों को अलग-अलग नंबर से फोन आया था। इससे पहले भी खमतराई में ऑनलाइन ठगी की शिकायत की हुई है। थाने में पदस्थ एक पुलिस अधिकारी भी ठगी का शिकार हो चुके हैं। उस मामले में आरोपी नहीं पकड़े गए हैं।
झारखंड के जामताड़ा इलाके में फैला ठगों का जाल
झारखंड की बार्डर पर जामताड़ा में ऑन लाइन ठगी का बड़ा रैकेट काम कर रहा है। यहां के छोटे-छोटे बच्चे भी ऑन लाइन ठगी में माहिर हैं। वे फोन पर लोगों को बातों में फंसाने में एक्सपर्ट हो चुके हैं। पुलिस वहां के बड़े गिरोह का पर्दाफाश कर चुकी है। ताजा मामलों में भी वहीं का लिंक होने के संकेत हैं।
ऐसे फंसाते हैं शिकार
पुलिस अफसरों ने बताया कि शातिर ठग मोबाइल का एक ही सीरिज के नंबर पर लाइन से फोन करते है। सभी को एक ही तरीके से झांसा दिया जाता है। झांसे में आने वाले से एटीएम का पासवर्ड पूछ लिया जाता है। एटीएम के ऊपर लिखा 16 अंक का नंबर पूछकर भी ठग खातों से पैसे निकाल लेते हैं। वे ज्यादातर ऑन लाइन शॉपिंग साइट में जाकर कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते है। मोबाइल व डिस टीवी का रिचार्ज करवाना भी उनके लिए आसान है। ज्यादातर ठगी के लिए फर्जी सिम का प्रयोग किया जाता है। एक बार उपयोग करने के बाद उसे बंद कर दिया जाता है ताकि लोकेशन न मालूम किया जा सके।