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मंत्री ने विरोध किया तो एसीबी ने जारी किया संपत्ति का ब्योरा

5 वर्ष पहले
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आईएएस-आईएफएस अफसरों पर छापों की वजह से इन संगठनों का एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के साथ विवाद अब तूल पकड़ रहा है। दो माह पहले आईएएस तथा दो दिन पहले आईएफएस एसोसिएशन के साथ वनमंत्री ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद एसीबी की ओर से भी इन छापों में अफसरों के पास अब तक मिली संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक कर दिया है।

एसीबी ने पिछले महीने 9 अफसरों के ठिकानों पर छापे मारे थे। इनमें से 7 अधिकारियों से मिली अनुपातहीन संपत्ति का ब्योरा उजागर कर दिया गया। बुधवार को सोशल मीडिया में भी अफसरों के नाम और उनकी प्रापर्टी छायी रही। संपत्ति हालांकि छापे के बाद भी सार्वजनिक की गई थी, लेकिन अभी जिस तरह से यह सामने आई उसे, एसीबी की ओर से पलटवार भी माना जा रहा है। हालांकि एसीबी के अफसरों ने संपत्ति उजागर करने की बात से इनकार किया है।

अफसरों का कहना है कि उनकी ओर से अधिकृत तौर पर ऐसे कोई आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं। दूसरी ओर एसीबी के सूत्रों का दावा है कि सोशल मीडिया में अफसरों की जितनी संपत्ति उजागर की गई है, उतनी ही दस्तावेजों में दर्ज है। चर्चा है कि पूरी जानकारी एसीबी की ओर से ही लीक हुई है। अब इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि आईएएस और आईएफएस एसोसिएशन के साथ वन मंत्री ने दो दिन पहले एसीबी की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से मिलकर अफसरों ने यहां तक कह दिया था कि उनके खिलाफ छापे दुर्भावना पूर्ण कार्रवाई है। अफसरों ने यह आरोप लगाया था संपत्ति का आंकलन बढ़ा चढ़ाकर किया गया है। अफसरों ने संपत्ति को लेकर दुर्भावना जाहिर की थी, माना जा रहा है कि इसी वजह से सोशल मीडिया में संपत्ति का ब्योरा जारी किया गया है।



गौरतबल है कि एसीबी ने पिछले महीने चार वन अफसरों सहित 9 अलग-अलग विभाग के अफसरों पर छापे मारे थे। उन्हीं छापों के दौरान कथित तौर पर मिली संपत्ति का ब्योरा ही सामने लाया गया है।

आईएएस ने खड़ा

किया कटघरे में
आईएफएस एसोसिएशन के एक दिन पहले ही नान मामले में फंसे आईएएस अनिल टुटेजा ने एसीबी की कार्रवाई को कटघरे में खड़ा किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि उनके मामले की नए सिरे से जांच करवाई जाए। वे किसी भी स्वतंत्र ईकाई से जांच करवाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने एसीबी पर झूठे केस में कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। एक के बाद एक मोर्चा खुलने के कारण एसीबी के अफसर विवादस्पद हो गए हैं। इसी वजह से ऐसी सूची को सामने लाना एक वजह बताई जा रही है।

सूची जो सोशल मीडिया में एसीबी के नाम से चल रही
अफसर का नाम व पद संपत्ति

आईएफएस एसएस बड़गैया 4 करोड़ 88 लाख

आईएफएस एएच कपासी 4 करोड़ 15 लाख

आईएफएस केके बिसेन 1 करोड़ 58 लाख

सीएमओ एसके बघेल 3 करोड़ 14 लाख

रेंजर टेकराम वर्मा 2 करोड़ 80 लाख

कृविवि अधीक्षक जीएल ठाकुर 2 करोड़ 54 लाख

कार्यपाल अभियंता टीआर कुंजाम 1 करोड़ 30 लाख

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