महिलाओं को हिंसा से बचाने आगे आए समाज
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने टोनही प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और यौन अपराधों की वजह से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए सरकार की वचनबद्धता को भी दोहराया।
अपने मासिक रेडियो प्रसारण में रविवार को कहा कि पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय मिल सके, इसके लिए कानून में जितना हो सकता था, सख्ती और कठोर दण्ड का प्रावधान किया गया है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए सरकार और कानून के साथ-साथ समाज को भी अपनी भागीदारी निभानी होगी। डॉ. सिंह ने कहा-इन्हीं भावनाओं को ध्यान में रखकर राजधानी रायपुर में देश का पहला ’सखी-वन स्टाप सेंटर’ शुरू किया गया है। डॉ. रमन सिंह ने बताया कि पीड़ित महिलाओं को सखी-वन स्टाप सेंटर में एक ही स्थान पर सभी प्रकार की सुविधाएं जैसे-चिकित्सा, कानूनी सहायता, पुलिस सहायता और परामर्श आदि के साथ अस्थायी रूप से पांच दिनों तक आवासीय सुविधा भी दी जाती है। डॉ. सिंह ने सेंटर के हेल्प लाइन (टोल फ्री नम्बर) 181 और कार्यालय के टेलीफोन नम्बर 0771-4061215 की भी जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को बताया कि ये टेलीफोन नम्बर चौबीसों घण्टे चालू रहते हैं। इन नम्बरों पर शिकायत दर्ज कर पुलिस वन स्टाप सेंटर की सेवाएं ली जा सकती हैं।
पुलिस में केस दर्ज होने से लेकर सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने तक पीड़ित महिलाओं को इस सेंटर में रखा जाता है। घरेलू हिंसा, बलात्कार, दहेज उत्पीड़न, एसिड अटैक, टोनही प्रताड़ना, कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, अवैध मानव व्यवहार, बाल विवाह, भू्रण हत्या, सती प्रथा, धोखाधड़ी, छेड़छाड़, गलत टेलीफोन नम्बरों से परेशानी, पेंशन संबंधी समस्या, सम्पत्ति विवाद, दैहिक शोषण आदि रूप में जो भी हिंसा समाज में व्याप्त है, ऐसे सभी प्रकरणों में पीड़ित महिलाओं को एकीकृत सेवाएं इस सेंटर में दी जाती हैं। मुख्यमंत्री ने अपने रेडियो प्रसारण को सुन रहे सभी समाज सेवी संगठनों, महिला संगठनों, जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और मीडिया से भी शासन की इस पहल का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने और पीड़ितों को इसका लाभ लेने के लिए प्रेरित करने का आव्हान किया।डॉ. रमन सिंह ने माघ पूर्णिमा के अवसर पर 22 फरवरी से शुरू हो रहे छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध राजिम कुंभ में शामिल होने के लिए प्रदेशवासियों को पिंवरा चांऊर यानी पीले चावल के साथ न्यौता दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की 21 तारीख को होने वाली छत्तीसगढ़ यात्रा की भी ’खुशखबरी’ दी।
और सभी लोगों को राजनांदगांव जिले के ग्राम कुर्रूभाट में प्रधानमंत्री के हाथों ’श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन योजना’ के शुभारंभ समारोह में शामिल होने का आमंत्रण दिया।
डॉ. सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा- सभी स्कूलों में 23 फरवरी से बोर्ड तथा इसी बीच घरेलू परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। दसवीं-बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं में प्राप्त सफलता बच्चों के सुनहरे भविष्य को तय करती है। आज से ठीक एक सप्ताह बाद परीक्षाएं शुरू हो चुकी होंगी। स्वभाविक हैं आप इसकी तैयारी में पूरे परिश्रम और मनोयोग से लगे होंगे। मुख्यमंत्री ने अपने बचपन के दिनों को और स्कूली जीवन को याद करते हुए कहा - बोर्ड परीक्षा के समय मुझे अलग ही रोमांच महसूस होता था। परीक्षा की तैयारी के दौरान मेरे मन में भी घबराहट होती थी, लेकिन उत्साह भी रहता था कि जितना अधिक परिश्रम करूंगा, उतना ही अच्छा परिणाम आएगा। मुझे याद है कि स्कूली परीक्षा के दौरान घर में हमारी माता जी हमें सवेरे चार बजे उठाया करती थीं, चाय बनाया करती थीं और जब परीक्षा देकर हम घर लौटते थे, यदि परीक्षा में प्रश्न अच्छे हल हुए, तो उनके चेहरे में सबसे ज्यादा चमक होती। मुझे भी मालूम है कि स्कूल की प्राथमिक परीक्षाओं में मैं बहुत आगे नहीं हुआ करता था, लेकिन बाद में धीरे-धीरे मुझे अहसास हुआ कि अगर हमें आगे बढ़ना है तो बाद की परीक्षाओं में हम और बेहतर करें। इसलिए आप आगें बढ़े, मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। डॉ. सिंह ने बच्चों के सुखद भविष्य की कामना करते हुए कहा-आप ने जो सपना देखा होगा, एक अच्छे डॉक्टर, एक अच्छे इंजीनियर, कलेक्टर, वैज्ञानिक, शिक्षक आदि बनने का, ईश्वर उसे अवश्य पूरा करें।