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गैस सत्यापन करने फिर पहुंचे घरों तक, इस बार 75 रुपए फीस भी

5 वर्ष पहले
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राजधानी में गैस एजेंसियों के कर्मचारी भी घर-घर जाकर गैस कनेक्शन का सत्यापन कर रहे हैं। सत्यापन के साथ 75 रुपए शुल्क भी लिया जा रहा है। एजेंसियों के मुताबिक कंपनियों ने हर दो साल में वेरीफिकेशन करने के लिए कहा है, इसलिए ऐसा किया जा रहा है। फीस भी कंपनियों के निर्देश पर ही ली जा रही है। गैस एजेंसियों के कर्मचारी अब तक सैकड़ों घरों में पहुंच गए हैं। लोगों ने बताया कि वेरिफिकेशन के दौरान वे नाम, पते और आवंटित सिलेंडरों की संख्या के साथ-साथ यह भी देख रहे हैं कि चूल्हा किस कंडीशन में है। इसे लेकर नाराजगी इसलिए जाहिर की जा रही है क्योंकि कुछ माह पहले ही कंपनियों ने वेरिफिकेशन किया था। कुछ दिन के भीतर दोबारा वेरिफिकेशन और उसमें भी 75 रुपए फीस का क्या औचित्य है। उधर, गैस एजेंसी के संचालकों का कहना है कि कंपनियों के आदेश पर वेरिफिकेशन भी हो रहा है और शुल्क भी ले रहे हैं। दरअसल इसके जरिए गैस के पूरे सिस्टम की जांच भी हो जा रही है, इसलिए शुल्क नाजायज नहीं है।

नहीं करेंगे जबर्दस्ती
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि कंपनी का यह स्पष्ट आदेश है कि हर दो साल में वेरिफिकेशन किया जाना चाहिए। उपभोक्ता अगर वेरिफिकेशन के लिए मना कर रहा है तो इससे उनका ही नुकसान है। ग्राहकों से वेरिफिकेशन के लिए जबर्दस्ती नहीं की जा सकती।

इसलिए वेरिफिकेशन
एजेंसी संचालकों ने बताया कि उनके कर्मचारी वेरिफिकेशन के दौरान गैस सिलेंडर के सभी वाल्व और नॉब, पाइप, चूल्हे की स्थिति और सुरक्षा साधनों की जांच कर रहे हैं। इसके साथ-साथ यह भी देखा जा रहा है कि कनेक्शन और गैस उपयोग करनेवाले का पता एक ही है या नहीं। ये चीजें इसलिए पुख्ता की जा रही हैं ताकि दुर्घटना होने पर उपभोक्ताओं को उचित मुआवजा दिलाया जा सके।

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