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गरीब बच्चों के लिए बनाने चले थे अमीरों सा स्कूल, पैसे ही कम पड़े

5 वर्ष पहले
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रायपुर | नई राजधानी में डेवलपमेंट के लिए अरबों रुपए खर्च कर रहे नया रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) की इस इलाके के गरीब बच्चों के लिए अमीरों जैसा मॉडल स्कूल (क्रिस्टल हाउस) बनाने की योजना में पैसों की कमी बड़ी रुकावट बन गई है। एनआरडीए ने 8 करोड़ रुपए के इस क्रिस्टल हाउस का निर्माण भी शुरू कर दिया, लेकिन अब तक इसके लिए केवल 3 करोड़ रुपए की इकट्ठा किए जा सके हैं। एनआरडीए ने यह रकम नया रायपुर क्षेत्र में काम करनेवाली कंपनियों से सीएसआर (कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत मांगे थे। कोंकण रेलवे (2 करोड़) और हाउसिंग बोर्ड (1 करोड़) को छोड़कर किसी कंपनी ने इस स्कूल के लिए पैसे ही नहीं दिए हैं। एनआरडीए अफसरों का कहना है कि फंड के लिए सख्ती की जाएगी, लेकिन तब भी पैसे नहीं मिले तो प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला स्कूल शुरू होने से पहले ही खतरे में आ सकता है।

नई राजधानी जिस क्षेत्र में बनाई जा रही है, वहां के 42 गांवों के उन बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए सेक्टर-25 में क्रिस्टल हाउस बनाना शुरू हुआ था, जो आर्थिक तौर पर सक्षम नहीं हैं या बीपीएल श्रेणी के हैं। अमेरिका का एक एनजीओ निशुल्क तौर पर इस स्कूल का संचालन करता है। उसके साथ एनआरडीए का अनुबंध हो चुका है। बेंगलुरू में क्रिस्टल हाउस का संचालन सफलतापूर्वक हो रहा है। इस स्कूल के लिए एनआरडीए को केवल स्कूल भवन व इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर देना है। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी क्रिस्टल हाउस प्रबंधन का होगा। बच्चों के पोशाक से लेकर खाने-रहने का इंतजाम भी स्कूल प्रबंधन ही करेगा। नया रायपुर के सेक्टर-25 में लगभग डेढ़ एकड़ में क्रिस्टल हाउस बनना है। इसे शैक्षणिक सत्र-2016 से ही शुरू किया जाना था, लेकिन पैसों की कमी की वजह से यह मामला ही अटक गया है।

मदद मांगी है
क्रिस्टल हाउस बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्कूल निर्माण में फंड के लिए विभिन्न कंपनियों एवं संस्थाओं से सीएसआर में सहयोग करने की अपील की गई है। फंड जुटने की उम्मीद है। महादेव कावरे महाप्रबंधक, एनआरडीए

थ्रीडी इमेज।

कंपनियों को था अंदेशा
जानकारों के अनुसार नई राजधानी की महत्वाकांक्षी क्रिस्टल हाउस योजना का टेंडर जारी होते समय ही कंपनियों को फंड कम रहने की आशंका हो गई थी। इसीलिए पहले टेंडर में मात्र दो कंपनियों ने ही आवेदन किया था। यही नहीं, 8 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनियों ने 15 से 20 करोड़ रुपए तक का टेंडर डाल दिया था। इसे एनआरडीए को कौंसिल करना पड़ा और दोबारा टेंडर हुआ। दूसरी बार में आठ करोड़ में टेंडर फाइनल तो हो गया, लेकिन अब बजट की कमी आड़े आ गई है। हालांकि माना जा रहा है कि बेंगलुरू स्कूल जैसे हॉस्टल, लाइब्रेरी, कैंटीन, गार्डन, प्ले ग्राउंड आदि बनाने के लिए 8 करोड़ रुपए भी कम पड़ जाएंगे।

देश का तीसरा स्कूल
क्रिस्टल हाउस द्वारा बंगलुरू और लवासा में जरूरतमंद बच्चों के लिए स्तरीय शिक्षा प्रदान करने स्कूल का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। देश का यह तीसरा स्कूल होगा, जहां ग्रामीण बच्चों को आधुनिक शिक्षा निशुल्क तौर पर दी जाएगी। यह स्कूल गैर सरकारी संगठन क्रिस्टल हाउस द्वारा संचालित किया जा रहा। अनुबंध के अनुसार इसमें बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। आवास एवं पर्यावरण मंत्री राजेश मूणत ने स्कूल भवन को जल्दी पूरा करने के लिए कहा था, ताकि पढ़ाई शुरू हो सके। लेकिन फंड की कमी से स्कूल अधर में है।

पहले सत्र में पांचवीं तक
क्रिस्टल हाउस में पहले शैक्षणिक सत्र में पांचवीं कक्षा तक ही बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद कक्षाएं बढ़ेंगी। एनआरडीए के सीईओ रजत कुमार ने बताया कि गैर सरकारी संगठन को निशुल्क तौर पर जमीन दी गई है, ताकि गरीब बच्चे भी एडवांस व आधुनिक शिक्षा के साथ जुड़ सकें। पढ़ने वाले बच्चों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही बच्चों के रहने, खाने से लेकर पोशाक व कॉपी-किताब भी मुफ्त में उपलब्ध होगी। पांच एकड़ क्षेत्र में स्कूल का कैंपस होगा, जिसमें बच्चों के खेलने के लिए बड़े मैदान भी होंगे। शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर पाठ्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी क्रिस्टल हाउस प्रबंधन पर होगा।

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भास्कर

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