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बिना ऑपरेशन हार्ट का इलाज, तीन बच्चों को जन्मजात बीमारी से राहत

5 वर्ष पहले
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रायपुर| अंबेडकर अस्पताल के कैथलैब में सोमवार को तीन बच्चों व एक युवती के दिल के सुराख को बिना ऑपरेशन के बंद किया गया। इसके लिए विशेष बटन का इस्तेमाल किया गया। पीजीआई चंडीगढ़ से आए अतिथि प्राध्यापक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मनोज कुमार रोहित व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने इलाज किया। उनका कहना है कि विशेष बटन से दिल का सुराख बंद होने के बाद खुलने की संभावना कम रहती है। इससे मरीज को जीवनभर के लिए राहत मिल जाती है।

पीपी टू में पढ़ रही चार वर्षीय रंजना (परिवर्तित नाम) अब स्कूल में सामान्य ढंग से पढ़ पाएगी। 23 वर्षीय साधना भी कॉलेज जाकर पढ़ाई कर सकेगी। दिल में सुराख होने के कारण उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। तिलकराज व दर्शिता को भी दिल की जन्मजात बीमारी से निजात मिल गई है। सभी का इलाज मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना व संजीवनी कोष से किया गया।





डॉ. रोहित ने कहा कि अंबेडकर अस्पताल में एक ही छत के नीचे कम खर्च पर हार्ट की बीमारियों का इलाज गरीब मरीजों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।





उन्होंने मेडिसिन व पीडियाट्रिक्स के रेसीडेंट डॉक्टरों का मार्गदर्शन भी किया।

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