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रविवि में एलएलएम का परचा अंग्रेजी में, हिंदी के छात्रों ने कोरा छोड़ दिया

5 वर्ष पहले
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ऐसे थे सवाल : विवि एलएलएम प्रथम वर्ष, प्रथम सेमेस्टर की यह परीक्षा नए पैटर्न से आयोजित कर रहा है। इसके तहत कुल 40 सवाल पूछे गए। इसमें 20 सवाल ऑब्जेक्टिव थे। जो एक-एक अंक के थे। 8 सवाल शॉट आंसर वाले थे, जिनके लिए दो अंक निर्धारित थे। 8 सवाल तीन अंक वाले थे। चार सवाल, पांच अंक के थे। इनके जवाब के लिए शब्दों की सीमा 150 अंक थी।

विवि लेगा फैसला : विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता छात्र कल्याण नीता बाजपेयी का कहना है कि एलएलएम के परचे में सवाल इंग्लिश में पूछे गए। विद्यार्थियों से यह शिकायत मिली है। इस म
रविवि में एलएलएम का परचा अंग्रेजी में, हिंदी के छात्रों ने कोरा छोड़ दिया
पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में सोमवार को एलएलएम की परीक्षा के दौरान हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम का परचा दिए जाने के बाद बवाल मच गया। विद्यार्थी अंग्रेजी का प्रश्नपत्र हाथ में आने के बाद भौंचक्क रह गए। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कैसे पर्चा दें? क्लास में मौजूद परीक्षकों ने हाथ खड़े कर दिए। नाराज परीक्षार्थियों ने जमकर हंगामा किया। उसके बाद भी उन्हें हिंदी माध्यम का पर्चा नहीं दिया गया। हताश विद्यार्थी परचा खाली छोड़कर बाहर आ गए। कॉलेज परिसर में भी उन्होंने अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की, लेकिन कोई आश्वासन नहीं दिया गया।

विवि परिसर में परचे की गड़बड़ी को लेकर दिनभर गहमागहमी रही। सब हैरान थे कि आखिर ये कैसे हो गया। परीक्षा में शामिल ज्यादातर परीक्षार्थी हिंदी मीडियम वाले थे। इसके बावजूद अंग्रेजी माध्यम का पर्चा छापकर बांट देना किसी को समझ नहीं आ रहा था। विवि के टीचर भी कोई जवाब नहीं दे पा रहे थे। छात्र बार बार यही कर रहे थे कि उन्होंने हिंदी मीडियम से पढ़ाई की है, अंग्रेजी में सवाल नहीं समझ पाएंगे तो उसके जवाब कहां से लिख सकेंगे। उनके किसी भी तर्क का कोई असर नहीं पड़ा। आखिरकार छात्रों ने विरोध करते हुए परीक्षा का बहिष्कार कर दिया।

45 मिनट किया हंगामा

नाराज विद्यार्थियों ने करीब 45 मिनट तक हंगामा किया। छात्रों के तेवर इतने बिगड़ गए थे कि उन्होंने हाथ में आंसरशीट व प्रश्नपत्र लेकर लहराते हुए विरोध किया। इसके कुछ देर बाद विवि के अफसर वहां पहुंचे। विद्यार्थियों ने उन्हें बताया कि प्रश्नपत्र में जितने भी सवाल पूछे जाते हैं वे हिंदी व इंग्लिश दोनों भाषाओं में रहते हैं। लेकिन इसमें सिर्फ इंग्लिश भाषा का उपयोग किया गया है। इसके अलावा कुछ प्रश्न कोर्स से बाहर के भी पूछे गए हैं।

पिछले कुछ सालों में विवि में परीक्षा के दौरान इस तरह बांटे गए परचे
दिसंबर 2016 में एमएड पहले सेमेस्टर की परीक्षा नए पैटर्न से होने वाली थी, लेकिन पुराने पैटर्न से सवाल पूछा गया।

एमएड के एक पर्चे में किसी को सौ अंक तो किसी को 80 अंक का पर्चा बांटा गया।

जून 2016, इतिहास की सेमेस्टर परीक्षा में एक पर्चा होने वाला था। इस दिन विद्यार्थी परीक्षा देने रविवि पहुंचे। काफी देर तक बैठने के बाद भी विद्यार्थियाें को पर्चा नहीं मिला। बाद में परीक्षा को कैंसिल किया गया।

मई-जून 2016 में, एक कॉलेज में बीएड का पर्चा होने वाला था। परीक्षार्थियों के पहुंचने के बाद कॉलेज को पता चला कि आज पर्चा है। गोपनीय विभाग व कॉलेज के बीच संवाद नहीं होने की वजह से यह स्थिति बनी। बाद में एक घंटे देरी से परीक्षा शुरू की गई।

सितंबर 2015, बीपीटी की परीक्षा में 50 अंक के पर्चे में 20 अंक के सवाल कोर्स से बाहर के थे। छात्रों के विरोध के बाद विवि ने एक महीने बाद पर्चा रद्द किया।

हिंदी मीडियम वाले छात्रों ने किया परीक्षा का विरोध
पहले भी हुई लापरवाही
शिक्षाविदों ने बताया कि परचे तैयार करने व उसे छपवाने में विवि ने गंभीरता नहीं दिखाई इस वजह से ऐसी लापरवाही सामने आई है। यह पहला मामला नहीं है। दिसंबर में हुए एंथ्रोपॉलॉजी के सेमेस्टर परीक्षा में भी एक परचा तैयार करने में अफसरों से चूक हुई। यह पर्चा प्रथम सेमेस्टर का था। विवि ने प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा नए पैटर्न से लेने की घोषणा की थी। विवि अध्ययनशाला के विद्यार्थियों ने इसी के अनुसार तैयार भी किया था लेकिन विद्यार्थियों को पुराने पैटर्न वाला पर्चा बांट दिया। यही नहीं दबाव बनाकर विद्यार्थियों से सवालों के जवाब भी हल कराए गए। परीक्षा खत्म होने के बाद विद्यार्थियों ने फिर हंगामा किया।

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