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ऐसे शुरू हुई मकानों की नापजोख, सिंपल ग्रेजुएट लड़कों को दिया टेप, एक घर नापा आधा घंटे में, शहर में लगेंगे 3 साल

4 वर्ष पहले
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राजधानी के मकानों की नापजोख के लिए जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफर्मेशन सिस्टम) सर्वे में दो साल पहले 11 करोड़ रुपए बर्बाद करने के बाद शुक्रवार से शहर में दूसरी कंपनी ने यही सर्वे फिर शुरू कर दिया है। पहले दिन देवेंद्र नगर सेक्टर-1 के मकानों की नापजोख शुरू हुई। कंपनी ने स्किल्ड लोगों के बजाय सिंपल ग्रेजुएट लड़कों को टेप देकर इस काम में लगा दिया। नतीजा, एक मकान के सर्वे में 20 मिनट से आधा घंटा तक लग गया। जिनके मकानों की नापजोख हुई, देरी की वजह से उन्हें सिस्टम पर ही ऐतराज जता दिया। नतीजा, पहले दिन 20 मकान नापे गए और कंपनी को काम लपेटना पड़ा।

नापजोख शुरू होने से लेकर इसके पूरा होने तक भास्कर टीम साथ थी। इस काम में दिल्ली की कंपनी कंसोर्टियम ने ऐसे लोगों को लगाया, जिन्हें न तो इसका अनुभव था, न उन लोगों ने इस विषय की पढ़ाई गई। सर्वे में हर विषय के ग्रेजुएट को लगाया गया। साथ में दो सुपरवाइजर भी थे। ये खुद को 15-20 साल का अनुभवी बताते रहे। इसके बावजूद टीम ने किसी मकान को नापने में आधा घंटा लगाया तो किसी में 20 मिनट, जबकि कंपनी को छह महीने में शहर की सवा दो लाख प्रापर्टी नापनी है।

पहले दिन सिर्फ 20 मकान

राजधानी में अनुमानत: 2.25 लाख मकान हैं। पहले दिन 20 का ही सर्वे हो पाया। कंपनी सूत्रों के मुताबिक कुछ दिन में रोजाना 200 मकानों का सर्वे हो जाएगा। यह रफ्तार भी रही तो सर्वे में तीन साल से ज्यादा लग जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि देवेंद्र नगर आरडीए की कालोनी है। यहां प्लाट एरिया और बिल्टअप लगभग एक जैसा है। यहां सर्वे में कम समय लगना चाहिए। यही नापजोख घनी बस्तियों में होगी तो ज्यादा दिक्कत आएगी।

सर्वे के तरीके से कुछ लोग नाराज भी हुए।

गड़बड़ी हुई तो रोक देंगे
कंपनी ने अनस्किल्ड लोगों को सर्वे में लगाया, यह पता चला है। कंपनी के डायरेक्टर को मेल करके यह जानकारी दी गई है। कंपनी केंद्र सरकार ने तय की है। कोई गड़बड़ी सामने आई तो सर्वे रोक दिया जाएगा। आरके डोंगरे, उपायुक्त राजस्व

घर का नाप लेते कंपनी के कर्मचारी।

नापजोख देखी तो रिश्तेदार फोन कर पूछने लगे...क्या हो गया?
सर्वे कंपनी ने शहीद हेमू कालाणी वार्ड में देवेंद्र नगर सेक्टर-1 के रेलवे क्रासिंग के पास सी-1 मकान से सर्वे शुरू किया। पहला और दूसरा मकान अंडर कंस्ट्रक्शन होने के कारण छोड़ा गया। एचआईजी टाइप एक मकान की नापजोख में ही टीम को 20 से 25 मिनट लगे। सी-18 में पहुंची टीम को सर्वे में आधा घंटा लगा। जानकी देवी के नाम पर रजिस्टर्ड इस प्रापर्टी के मालिक अशोक रंगलानी सर्वे टीम पर ही बिफर गए। दरअसल नापजोख के दौरान उनके घर के सामने भीड़ लगी तो रिश्तेदारों और परिचितों के फोन आने लगे कि क्या हुआ, इतनी भीड़ क्यों है? सबको सफाई देते-देते वे टीम के तरीके पर ही भड़के और सुपरवाइजरों को बताया कि इस लाइन में आरडीए ने प्लाट का स्टैंडर्ड साइज 40 बाई 60 रखा है, इसलिए इसे नापना जरूरी नहीं है। सिर्फ बिल्टअप एरिया ही नापा जाए, जिससे बहुत ही कम समय लगेगा। सर्वे में बहुत अधिक समय लगने की वजह से कुछ और लोगों ने आपत्ति की। कई मकानों में ताले लगे मिले। एक-दो मकानों में तो लोग नापजोख करवाने के लिए बाहर ही नहीं आए। टीम ऐसे मकानों का नंबर नोट करके आगे बढ़ गई।

ये है सर्वे का सिस्टम
सर्वे कंपनी ने मोबाइल एप बनाया है, जिसमें हर प्रापर्टी की डिटेल अपलोड है। यह निगम के रिकार्ड में भी है। एप में सर्वे का पूरा फार्मेट भी है, जिसमें प्लाट एरिया, बिल्टअप एरिया, मालिक का नाम-पता, आधार नंबर तथा अन्य जानकारियां देनी हैं। सर्वे के तुरंत बाद ये जानकारियां एप में डाउनलोड हो जाएंगी। इस आधार पर टैक्स का कैलकुलेशन होगा। नए और पुराने कैलकुलेशन में जो भी ज्यादा होगा, टैक्स उसी आधार पर लगेगा। इसके लिए दावा-आपत्ति भी मंगाई जाएगी।

पुराना सर्वे भी दफ्तर में बैठे-बैठे गूगल मैप केे आधार पर
पिछली बार राज्य शासन ने जीआईएस सर्वे कराया था। तब भी दिल्ली की एक कंपनी ने सर्वे किया था। कंपनी के लोगों ने दफ्तर में बैठे-बैठे गूगल मैप के आधार पर सर्वे कर दिया। इसलिए धार्मिक संस्थानों, तालाबों, सरकारी दफ्तरों और सरकारी प्लाटों को भी निजी बताकर प्रापर्टी टैक्स के दायरे में ला दिया गया। इसके लिए कंपनी को 11 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। कंपनी के सर्वे रिपोर्ट को विश्वसनीयन नहीं मानते हुए इसकी रिपोर्ट को स्वीकार ही नहीं किया गया और इसी वजह से फिर से सर्वे कराया जा रहा है। पिछले दस दिनों से कंपनी के लोग डेमो कर रहे हैं। इसके बाद भी शुक्रवार से शुरू हुए आफिशियल सर्वे में कंपनी का काम संतोषजनक नहीं रहा।

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट
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