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आंखों में दहशत का मंजर

4 वर्ष पहले
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8 साल की मासूम के सामने करंट से पिता, मां, दादी और चाची की मौत, 1 साल का चचेरा भाई तड़पती मां के पास पहुंचता उससे पहले खींच लिया

आंखों में दहशत का मंजर

बिना सुरक्षा एक-एक को बचाने की कोशिश में हुई मौतें
सत्यानारायण के घर से लगी बाड़ी में एक कुआं है। कुएं से पानी निकालने के लिए टिल्लू पंप लगा है। उसी पंप में लगा बिजली का तार एक जगह से कटा था। शुक्रवार सुबह डामिन बाई ने कपड़े सुखाने के लिए पंप के तार पर डाले। गीले कपड़े तार के कटे हुए हिस्से के संपर्क में आ गए और डामिन को करंट से लग गया। वह चीखने लगी, आवाज सुनकर सास राजबाई उसे बचाने आई। सास ने बिना किसी सुरक्षा के उसे बचाना चाहा इस वजह से वह भी करंट की चपेट में आ गई। दोनों की चीखें सुनकर सत्यनाराण और चित्रलेखा बचाने दौड़े। लेकिन उन्होंने भी बिना किसी सुरक्षा के बचाना चाहा। एक के बाद एक वे दोनों भी करंट की चपेट में आ गए।’’ -आशीष तिवारी, गुरूर टीआई

हादसे के बाद से रुद्र नेहा के साथ है। नेहा की आंखें वो दर्द बयां कर रही हैैं जिसे उसने इतनी सी उम्र में सहन किया। रुक-रुककर ढालेंद्र (लाल टीशर्ट) को भी वो दिलासा देती है।

भास्कर न्यूज|बालोद

जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर गुरुर ब्लाॅक का सोरर गांव। शुक्रवार सुबह 6.30 बजे करंट लगने से यहां पटेल परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। मतृकों में घर के मुखिया सत्यनारायण पटेल (37), उनकी मां राजबाई पटेल (57), प|ी डामिन बाई (30) और भाई की प|ी चित्ररेखा बाई (25) शामिल हैं। पर इस दुर्घटना में बहन नेहा की वजह से रुद्र (1) बाल-बाल बच गया। उसकी मां जब करंट लगने से चीख रही थी तो वह मां की आवाज सुनकर घुटने के बल उसके पास जाने लगा। सत्यनारायण की बेटी नेहा घर के आंगन में थी उसके सामने एक-एक कर परिजन करंट की चपेट में आ रहे थे। चचेरे भाई को बचाने के लिए वह दौड़ी और उसे पकड़ लिया। दोनों सुरक्षित हैं। घटना की सूचना नेहा ने ही पड़ोसियों को दी। घटना के समय सत्यनारायण का छोटा भाई जितेंद्र रायपुर में था।

अब परिवार में बचे हैं सत्यनारायण का छोटा भाई जितेन्द्र (29), उसका बेटा रुद्र (1), भतीजी नेहा (8) व भतीजा ढालेंद्र (10)।

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