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शहर में एक लाख के पास कार्ड नहीं, फिर भी स्मार्ट कार्ड बनना बंद

5 वर्ष पहले
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फ्री इलाज के लिए हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाने का अभियान छह महीने से बंद है। रायपुर में ही एक लाख लोगों के पास कार्ड नहीं है। राज्य के लगभग हर जिले में यही स्थिति है। इसके बावजूद कार्ड बनाने का काम ठप है।

पिछले छह महीने के दौरान दो बार कार्ड बनाने के लिए शिविर का आयोजन किया गया था। कागजी खानापूर्ति की गई, लेकिन ज्यादातर परिवारों के कार्ड नहीं बने। लोग अभी भी स्मार्ट कार्ड के इंतजार में है।

राज्य में नए साल से फ्री इलाज के लिए आरएसबीवाय व एमएसबीवाय हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद थी। अभी तक इसकी घोषणा नहीं की गई, जबकि रायपुर जिले में ही एक लाख से ज्यादा परिवारों के पास कार्ड नहीं है। यह सरकारी आंकड़ा है। पिछले साल डेढ़ लाख परिवारों के पास कार्ड नहीं थे। इसके लिए शिविर का आयोजन किया गया। पूरे शहर में अलग-अलग वार्ड के आधार पर शिविर आयोजित किए गए। शत प्रतिशत परिवारों का कार्ड बनाने का दावा किया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट में ही खुलासा हुआ है कि अब तक एक लाख से ज्यादा कार्ड नहीं बने हैं। इससे पूरे सिस्टम पर ही सवाल खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार शिविर में कागजी प्रक्रिया तो छूटे हुए 90 फीसदी परिवारों की हो चुकी है, लेकिन दिल्ली से ही आगे की कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी वजह से यह स्थिति पैदा हुई है। ऐसे परिवार जिनके कार्ड नहीं बने हैं वे बार-बार चक्कर काट रह हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के ऑफिस से उन्हें आश्वासन देकर लौटा दिया जा रहा है।

797 अस्पतालों में इलाज

स्मार्ट कार्ड से इलाज के लिए 793 सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों से अनुबंध किया गया है। इसमें सरकारी 336 व निजी अस्पतालों 461 है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक अस्पतालों ने कुल 27 लाख 68 हजार 865 क्लेम किया है। इसके विरुद्ध 16 लाख 15 हजार 189 रुपए भुगतान किया गया है।



55.80 लाख कार्डों का नवीनीकरण

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने नए साल 55 लाख 80 हजार 715 स्मार्ट कार्डों का नवीनीकरण करने का दावा किया है। स्मार्ट कार्ड आरएसबीवाय व एमएसबीवाय के हैं। उनका कहना है कि नवीनीकरण के बाद स्मार्ट कार्डधारी पंजीकृत अस्पताल में जाकर इलाज करवा सकते हैं।

इलाज का पैकेज पहले की ही तरह 30 हजार रुपए है।

अफसरों का कहना है अभी जरूरत नहीं शिविर की
स्वास्थ्य संचालक आर. प्रसन्ना ने बताया कि योजना के लिए दी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से करार किया गया है। नए साल के लिए कंपनी की पूरी टीम काम कर रही है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट कार्ड का पैकेज 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपए करने का प्रस्ताव है। शासन से आदेश आते ही पैकेज बढ़ाया जाएगा। अभी स्मार्ट कार्ड के लिए शिविर का आयोजन नहीं किया जा रहा है। शिविर की जरूरत नहीं है। इसके कहीं से कोई मांग नहीं आई है।

भटक रहे परेशान लोग
गुढ़ियारी के संतोष गुप्ता की शिकायत है कि उसने तीन बार स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए आवेदन किया, लेकिन स्मार्ट कार्ड अब तक नहीं बना है। प|ी के अलावा दो बच्चों के पिता संतोष का कहना है कि जब परिवार के सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, उन्होंने नकद इलाज करवाया। स्मार्ट कार्ड नहीं बनने के बारे में उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों से शिकायत की तो कहा कि आवेदन दीजिए, शिविर लगेगा तो बन जाएगा। ऐसा ही हाल कोटा निवासी राजेंद्र ठाकुर का है। तीन साल से उनका भी स्मार्ट कार्ड नहीं बन पाया है। राजेंद्रनगर, बैजनाथपारा, संतोषीनगर, मौदहापारा, सेजबहार और शहर के आउटर के कई वार्डों में हजारों लोग हैं, जिसका स्मार्ट कार्ड नहीं बन सका है। हालांकि वे कागजी प्रक्रिया के तौर पर आवेदन कर चुके हैं।

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