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पंडित भी होंगे अब स्मार्ट और डिग्रीधारी

News - छत्तीसगढ़ के पंडित अब स्मार्ट और डिग्रीधारी होंगे। संस्कृत विद्यालयों में अब व्यावसायिक कोर्स भी पढ़ाए जाएंगे।...

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2017, 03:25 AM IST
पंडित भी होंगे अब स्मार्ट और डिग्रीधारी
छत्तीसगढ़ के पंडित अब स्मार्ट और डिग्रीधारी होंगे। संस्कृत विद्यालयों में अब व्यावसायिक कोर्स भी पढ़ाए जाएंगे। इनमें प्रवचन, पुरोहित व ज्योतिष विद्या से संबंधित विषय भी शामिल हैं। हायर सेकेंडरी यानी उत्तरा-मध्यमा से छात्र इन विषयों को चुन सकेंगे। खास बात यह भी कि अब नए खुलने वाले संस्कृत विद्यालयों को गुरुकुल की तर्ज पर होंगे। शिक्षा विभाग व संस्कृत विद्यामण्डलम् ने मिलकर अपनी यह नई योजना राज्य शासन को भेज दी है। इसके लिए बजट में भी प्रावधान करने का आग्रह किया गया है।

योजना के पीछे विभाग का उद्देश्य है छत्तीसगढ़ में पुरोहित, ज्योतिष व प्रवचन के कोर्स को बढ़ावा देकर अच्छे व दक्ष पंडितों की कमी को दूर की जा सके। वर्तमान में प्रवचन के लिए ज्यादातर प्रवचनकर्ता काशी, अयोध्या मथुरा से ही बुलाए जाते हैं। संस्कृत विद्यामण्डलम् के अध्यक्ष डॉ. गणेश कौशिक का मानना है कि कोर्स करने के बाद यहां के छात्र भी दूसरे प्रदेशों में प्रवचन करने जा सकेंगे। पूजा-पाठ के दौरान श्लोकों का उच्चारण भी सही कर सकेंगे। गुरुकुल की तर्ज पर खुलने वाले विद्यालयों में पौराणिक काल का परिदृश्य होगा। वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी धोती-कुर्ता ही पहनेंगे। संस्कृत ही बोलेंगे। कोसरंगी विद्यालय में प्रयोगात्मक तौर पर इसकी शुरूआत की गई है। प्रवचन, पुरोहित व ज्योतिष के कोर्स शुरू करने के पीछे जानकारों का तर्क है कि देर सवेर ये सभी जीएसटी के दायरे में आएंगे। ज्योतिष, वेद, धार्मिक संस्कार व कर्मकांड करने वालों को दी जाने वाली दक्षिणा पर जीएसटी लग सकता है।



इस वजह से उन्हें भी अपनी योग्यता दर्शानी ही होगी। जो पुराने पंडित -ज्योतिष हैं उन्हें भी देर सवेर अपने को अपडेट करना ही होगा। क्योंकि सरकार जिन विषयों को सर्विस टैक्स के दायरे में ला रही है उनकी लीगल वैल्यू व वैलिडिटी भी तय होगी। जो भी यजमान किसी पूजा या संस्कार के लिए पंडितों को दक्षिणा देगा वह उसकी क्वालिटी पर भी सवाल कर सकेगा।

सरकार बोर्ड भी बनाए, जीएसटी की मांग: त्रिपाठी

पं. प्रियाशरण त्रिपाठी का कहना है कि जीएसटी लागू हो जाने पर पंडितों की भी योग्यता का पैमाना तय करना जरूरी हो जाएगा। इस वजह से सरकार का यह कदम सराहनीय है। राज्य सरकार को आध्यात्मिक विधाओं से जुड़े लोगों के लिए एक बोर्ड का भी गठन करना चाहिए। पुरोहिताई की पढ़ाई से ज्ञान की सार्वभौमिकता, एकरूपता व सामाजिक सरोकार में इजाफा होगा।

इंजीनियर व डॉक्टर भी बन सकेंगे

अब तक केवल आर्ट्स की पढ़ाई संस्कृत विद्यालयों में हो रही है। अब बॉयोलाजी, फिजिक्स व मैथ्स भी पढ़ाए जाने से यहां के छात्र इंजीनियर व डाक्टर भी बन सकेंगे। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 174 संस्कृत विद्यालय हैं। इनमें करीब 11 हजार छात्र पढ़ रहे हैं। बस्तर संभाग में केवल कांकेर जिले के भानूप्रतापपुर में ही विद्यालय है। बाकी जिलों में खोले जाने हैं। शिक्षामंत्री केदार कश्यप हर जिले में कम से कम एक संस्कृत विद्यालय खोलना चाहते हैं।

इस बारे में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से भी चर्चा हो चुकी है। दुर्ग, जशपुर, बिलासपुर, जांजगीर व सरगुजा जिलों में संस्कृत विद्यालयों को अच्छा रिस्पांस मिला है।

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