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ये तो कमाल है

5 वर्ष पहले
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पिछले साल दस लाख की दो एकड़ फसल बरबाद हुई, इस साल बैंक में मुआवजे की रकम जमा हुई सात रुपए 38 पैसे
निश्चय कुमार | @nishchaykumar28

रायपुर. तिल्दा के सासाहोली गांव के किसान हरिराम यदु का पौने तीन एकड़ खेत है। पिछले साल उन्होंने इसमें धान की फसल लगाई। दो एकड़ की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई। उन्हें राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना से उम्मीद थी कि इसके अन्तर्गत उनको क्षतिपूर्ति की अच्छी खासी राशि मिल जाएगी। मगर मुआवजा देखकर उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। उन्हें मुआवजा मात्र 7 रुपए 38 पैसे मिला है। हरिराम को लगा था कि धान लगाने से लेकर बियासी, रोपाई के साथ ही मजदूरी में जो पैसे उन्होंने खेत में लगाए हैं, वे सारे बीमा कंपनी से मिल जाएंगे। मगर उनके होश तब उड़ गए जब सोसायटी के निचले तबके कर्मचारियों ने उनके घर आकर राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना की क्षतिपूर्ति राशि का सर्टिफिकेट लाकर दिया। उनके बैंक खाते में क्षतिपूर्ति की राशि जमा होने का पूरा विवरण सर्टिफिकेट में दर्ज था। दो एकड़ खेत में लगी धान की फसल बरबाद होने का उनकाे ये राशि उनके बैंक खाते में जमा हुई है। शेष|पेज 7



हरिराम को यकीन नहीं हुआ कि दो एकड़ की फसल का 7 रुपए 38 पैसे किस तरह से मुआवजा सरकार ने दिया। वे खुद तिल्दा में अपने बैंक गए। वहां अपने खाते का डीटेल निकलवाया। तब पता चला कि उनके खाते में फसल बीमा मद से सात रुपए 38 पैसे जमा हुए हैं।

हरिराम ने भास्कर संवाददाता को बताया कि उन्होंने पौने तीन एकड़ के खेत में पिछले साल धान लगाया। चूंकि पिछले साल पानी कम गिरा। इसलिए उनके दो एकड़ का खेत सूख की चपेट में आ गया। पौन एकड़ तक तो उन्होंने किसी तरह से सिंचाई कर ली। मगर बचे हुए दो एकड़ तक पानी नहीं पहुंच पाया। पूरी फसल चौपट हो गई। पौने तीन एकड़ खेत को धान लगाने के लिए तैयार करने में ही दस लाख से अधिक रकम लग गई। पौन एकड़ की जो फसल काटी उस धान को बेचा तो मात्र 50 हजार रुपए के करीब मिले। फसल का बीमा हुआ था, इसलिए मन में तसल्ली थी कि मुआवजा की राशि मिल जाएगी तो मुझको अधिक नुकसान नहीं होगा। लेकिन जब पता चला कि सात रुपए 38 पैसा मुआवजे की रकम बैंक खाते में जमा हुई है तब तो पांव के नीचे से जमीन ही खिसक गई।

पुरानी पद्धति की िवसंगति
कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि गणना की पुरानी पद्धति की वजह से ऐसा हुआ होगा। इस बारे में इंश्योरेंस कंपनी बेहतर बता सकती है। सरकार ऐसी स्थिति फिर न आए इसकी व्यवस्था करेगी। वैसे नई बीमा योजना में इस तरह की विसंगति देखने को नहीं मिलेगी।

केंद्र से नहीं मिले फसल बीमा के दस करोड़
कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सोमवार को केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह आए थे। अफसरों ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि किसानों को भुगतान करने के लिए दस करोड़ रुपए केंद्र से अभी तक नहीं मिले हैं। केंद्रीय मंत्री राधा मोहन ने तत्काल दिल्ली फाेन पर अधिकारियों से चर्चा करके पैसे जारी करने के निर्देश भी दिए। अफसरों ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि इस साल प्रदेश में 13 लाख 66 हजार 302 किसानों को बीमा के दायरे में लाया गया है। इसमें 12 लाख 9 हजार 357 ऋणी किसान और एक लाख 56 हजार 945 अऋणी किसान है।

राष्ट्रीय कृषि बीमा क्षतिपूर्ति का स्वीकृति पत्र। इनसेट-हरिराम।

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