संपत्ति कर एकमुश्त बढ़ाने के बजाय बढ़ सकता है किस्तों में
नगर निगम एक्ट के तहत राजधानी समेत प्रदेश के सभी नगर निगमों में संपत्ति कर में 50 फीसदी वृद्धि के मामले में नगरीय प्रशासन विभाग ने कुछ नरम रुख अपना लिया है। राजधानी के मेयर प्रमोद दुबे समेत सभी कांग्रेस शासित निगमों के महापौरों ने घोषणा कर दी थी कि वे संपत्ति कर नहीं बढ़ने देंगे। प्रदेशभर में इस वृद्धि के तीखे विरोध के बाद उच्चपदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि निगम चाहें तो एकमुश्त 50 फीसदी के बजाय किस्तों में संपत्तिकर बढ़ा सकते हैं। खबर तो ये भी है कि आने वाले बजट में विभाग कुछ ऐसा प्रावधान भी कर सकता है ताकि इस प्रस्तावित वृद्धि से शहरी आबादी को और राहत मिल जाए। यह संकेत नगर निगम प्रशासन को भी मिले हैं, इसलिए अफसरों ने टैक्स में वृद्धि का फार्मूला तैयार करने का काम ही शुरू नहीं किया है। बल्कि यह तैयारी शुरू हो गई है कि संपत्ति कर के अलावा किन साधनों से नगर निगम की आमदनी बढ़ाई जा सकती है।
महापौर के तीखे विरोध के बावजूद रायपुर निगम कमिश्नर डा. सारांश मित्तर का कहना है कि निगम का राजस्व हर साल बढ़ रहा है, लेकिन यह काफी नहीं है। इसलिए संपत्तिकर बढ़ना चाहिए क्योंकि 1997 से इसमें वृद्धि भी नहीं हुई है। लेकिन वृद्धि की दर को लेकर उन्होंने साफ कर दिया है कि नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देश की प्रतीक्षा है। सूत्रों का कहना है कि संपत्ति कर में वृद्धि को लेकर विभाग इस नतीजे पर पहुंचा है कि एकमुश्त वृद्धि से आम लोगों पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ सकता है।
नगर निगमों से कहा गया है कि वे अपने एक्ट के अनुसार संपत्ति कर बढ़ाएं, लेकिन वे चाहें तो टैक्स एकमुश्त बढ़ाने के बजाय 10-10 फीसदी वृद्धि तीन-चार साल के भीतर कर सकते हैं। इससे बोझ भी महसूस नहीं होगा।
बढ़ाने से भी लाभ कम
निगम प्रशासन ने पिछले साल शहर के 1.76 लाख मकान-निर्माण से 90 करोड़ रुपए राजस्व वसूला था। इसमें 33 करोड़ रुपए संपत्तिकर के हैं। हाल में हुए अलग-अलग सर्वे में राजधानी में मकानों की संख्या 2.25 लाख निकली है। अर्थात करीब 50 हजार मकान टैक्स के दायरे में नहीं हैं। अफसरों का कहना है कि अगर इन्हें भी टैक्स के दायरे में लाया गया तो संपत्ति कर में वैसे ही वृद्धि हो जाएगी। लेकिन अगर मौजूदा मकान मालिकों से 50 फीसदी वृद्धि के हिसाब से टैक्स वसूला गया, तब भी निगम की आय 17 करोड़ रुपए ही बढ़ेगी।
वसूली भी सही नहीं
नगर निगम की टैक्स वसूली की दर में भी बड़ी गड़बड़ हाल में सामने आई है। दो महीने पहले निगम ने टैक्स के पुनर्निर्धारण के लिए बड़े भवनों की नापजोख की थी तो खुलासा हुआ था कि उस हिसाब से टैक्स लिया ही नहीं जा रहा है। नापजोख के बाद सैकड़ों निर्माण पर टैक्स 50 हजार से 3 लाख तक बढ़ाया गया था। अफसरों का कहना है कि अगर इस विसंगति को दूर कर फिर से नापजोख करके टैक्स वसूला जाए तो संपत्ति कर वृद्धि की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
33 करोड़ संपत्तिकर
नगर निगम रायपुर ने पिछले साल 90 करोड़ रुपए की राजस्व वसूली की। इसमें शुद्ध रूप से संपत्तिकर के 33 करोड़ रुपए हैं। अन्य मदों में जलकर, समेकित कर व अन्य तरह के कर शामिल हैं। शासन के आदेशानुसार सिर्फ संपत्तिकर में वृद्धि होगी। यानी निगम को मिलने वाले 33 करोड़ रुपए में 50 फीसदी वृद्धि होगी। इससे संपत्तिकर 16.5 करोड़ रुपए बढ़ जाएगा। यानी कुल संपत्तिकर 90 और 16.5 करोड़ यानी 106.5 करोड़ रुपए हो जाएगा।
भाड़ा मूल्य पर गणना
संपत्तिकर की गणना वार्षिक भाड़ा मूल्य के आधार पर की जाती है। वार्षिक भाड़ा मूल्य की गणना के लिए शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में दरें 18 रुपए से 46 रुपए वर्गफुट तक है। इसी दर में वृद्धि किया जाना है। दरें कुछ इस आधार पर तय की जाएंगी कि उस आधार पर संपत्तिकर की गणना हो तो अगले वित्त वर्ष में लोगों के संपत्तिकर में कम से कम 50 फीसदी की वृद्धि हो जाए। जानकारों का मानना है कि जहां वार्षिक भाड़ा दर ज्यादा है, वहां वृद्धि होने से उसके दायरे में आने वाले लोगों पर भार बहुत अधिक बढ़ सकता है।
नगर निगम का राजस्व तो हर साल बढ़ ही रहा है। इसलिए निगम की आमदनी बढ़ाने के लिए संपत्तिकर में वृद्धि का प्रस्ताव सही नहीं हैं। वह भी एकमुश्त 50 फीसदी तो होना ही नहीं चाहिए। प्रमोद दुबे, महापौर रायपुर
1997 से संपत्तिकर में वृद्धि नहीं हुई है। लिहाजा वृद्धि तो होनी ही चाहिए। नगरीय प्रशासन विभाग को दावा-आपत्तियां भेजी गई हैं। निराकरण के बाद जैसा आदेश आएगा, उसी तरह वृद्धि करेंगे। डा. सारांश मित्तर, नगर निगम कमिश्नर
मालवीय रोड स्थित जोन कार्यालय में संपत्तिकर जमा करने पहुंचे लोग।
बजट में भी संपत्ति कर के मामले में थोड़ी राहत देने की तैयारी