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योग-प्राणायाम का अनुशासन, कैमरों से नजर और पिछड़े स्कूल ने छू लिया आसमां

5 वर्ष पहले
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राजधानी के आउटर पर स्थित माना बस्ती का सरकारी हाई स्कूल। दोपहर 2 बजे। 10वीं का क्लास रूम। पूरी कक्षा में सन्नाटा पसरा है। छात्राएं स्टडी टेबल पर ही प्राणायाम में लीन हैं। कौन आ रहा और कौन जा रहा किसी को मतलब नहीं। स्कूल के ही दूसरे हिस्से में। कुर्सी टेबल पर भोजन की थालियां सजी है। बेल बजी और बच्चे कतार में वहां दाखिल हुए। कोई हल्ला गुल्ला नहीं। खामोशी से सबने एक-एक कर अपनी सीट संभाली और भोजन करने लगे। हर बच्चा अनुशासित। भोजन के पहले बच्चों ने जूते और चप्पल भोजन कक्ष के बाहर ही उतार दिया था। भोजन के दौरान भी ऐसा अनुशासन तो घर में भी नहीं दिखाई देता। स्कूल के इसी अनुशासन ने बच्चों की सोच और उनके व्यवहार को इतना बदल दिया है कि अब यहां के बच्चे बोर्ड की परीक्षाओं में 90-92 प्रतिशत तक प्राप्त कर रहे हैं।

स्कूल हालांकि पहले से ऐसा नहीं था। पर अब प्राणायाम और अनुशासन ग्यारह सौ बच्चों वाले इस स्कूल की पहचान बन गया है। यह बदलाव शुरू हुआ छह साल पहले जब स्कूल के प्राचार्य की कुर्सी दिलीप केशरवानी ने संभाली। उन्होंने एक-एक कर बदलाव शुरू किया। स्कूल के बच्चे लेट आते थे। आधी छुट्टी से भागना भी आम बात थी। अनुशासन के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही थी। प्राचार्य ने सबसे पहले स्कूल के पूरे परिसर को सीसी कैमरे की नजर में कैद किया। बरामदे से लेकर क्लासरूम में कैमरे लगाए गए। कैमरों का कंट्रोलरूम अपने कमरे में रखा और वहां बैठकर स्कूल के एक-एक हिस्से की निगरानी शुरू की। उसके बाद उन्होंने बच्चों में अच्छी उर्जा और उनके बेहतर स्वास्थ्य के उद्देश्य से प्राणायाम शुरू करवाया। मध्यान्ह भोजन का सिस्टम बनाया। बस इसी एक छोटी से लेकिन मजबूत पहल ने स्कूल का पूरा माहौल बदल दिया। अब यहां पढ़ाई के लिए बच्चों में होड़ है। उनके व्यवहार और सोच में गजब का परिवर्तन आ रहा है। हर बच्चे को यह पता है कि उसे आगे क्या करना है, किस दिशा में बढ़ना है।

प्राणायाम करतीं हुई छात्राएं।

प्राचार्य के धैर्य और नई सोच ने माना बस्ती के स्कूल का माहौल बदल दिया
ठान ली और पूरा किया
बच्चों के व्यवहार और उनकी एकाग्रता बढ़ाने के लिए उन्होंने खुद योग और प्राणायाम की ट्रेनिंग ली। उन्होंने मिडिल से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूल के बच्चों को प्राणायाम करना शुरू कर दिया। प्रार्थना के दौरान भी कुछ मिनट तक योग और ध्यान कराने लगे। इसके नतीजे धीरे-धीरे सामने आने लगे।

10वीं में 54 और 12वीं का 80 फीसदी बच्चे पास

स्कूल की पढ़ाई का स्तर सुधरने के साथ ही इसके नतीजों में भी बदलाव शुरू हो गया है। स्कूल में हाई स्कूल का नतीजा 45-48 प्रतिशत से बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है। बारहवीं बोर्ड में 80 फीसदी तक बच्चे पास हो रहे हैं। शिक्षकों का दावा है कि एक-दो साल में बारहवीं बोर्ड का परीक्षा 90 फीसदी तक हो जाएगा। इसका लक्ष्य तय किया गया है।

कंप्यूटर स्क्रीन पर मॉनिटरिंग करते प्राचार्य।

आज स्कूल के माहौल को देखकर खुशी होती है। यह सामूहिक प्रयास का नतीजा है। बच्चों में सकारात्मक बदलाव आया है। आज स्कूल के हर बच्चे को पता है कि उसे किस दिशा में जाना है। इनके बदलने से गांव का माहौल भी बदला है। दिलीप कुमार केशरवानी, प्राचार्य, माना स्कूल

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