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ट्रांसपोर्टिंग व बोनस राशि पर सहमति नहीं

5 वर्ष पहले
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दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना करकाभाट में गन्ने की पेराई सत्र चल रही है। वर्तमान में बालोद जिले के अलावा बेरला, बेमेतरा, राजनांदगांव, रायपुर, दुर्ग व आसपास क्षेत्र के किसान गन्ना लेकर कारखाना पहुंच रहे है।

इस बार कवर्धा से गन्ना नहीं पहुंचा है। पेराई सत्र मार्च-अप्रैल तक चलें। इसके लिए अब कारखाना प्रबंधन कवर्धा से गन्ना मंगाने की तैयारी में है लेकिन अब तक इस पर सहमति नहीं बन पाई है।

क्योंकि गन्ना लाने के एवज में कवर्धा के किसान ट्रांसपोटिग व बोनस राशि की मांग कर रहे है। जिस पर अब तक कोई सहमित नहीं बन पाई है। दो जिले के प्रशासन व जनप्रतिनिधि इस दिशा में पहल करेंगे, तभी कवर्धा से गन्ना आ पाएगा। एक-दो दिनों में इस संबंध में परिणाम आने की उम्मीद है।

प्रतिदिन 50 ट्रक गन्ने की हो रही खपत
कारखाने में प्रतिदिन 50 ट्रक गन्ने की खपत होती है। लेकिन रोजाना 50 ट्रक गन्ना पेराई के लिए उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। कुछ ही दिन पेराई के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ना पहुंचा। कारखाना के 345 कर्मचारी हर समय काम करने के लिए तैयार है लेकिन गन्ना के अभाव में कारखाना नियमित चालू नहीं रह पाता। पर्याप्त गन्ना नहीं मिलने की वजह से कारखाना चार महीने ही चल पाता है। इस बार पेराई सत्र शुरू हुए दो माह हो चुके है।

31 हजार िक्वं. उत्पादन
अब तक 38 हजार 712 टन गन्ने की पेराई हो चुकी है। जिसमें 31 हजार 310 क्विंटल शक्कर उत्पादन हुआ है। ओवरआल औसत एक क्विंटल गन्ना पेराई में 8.39 किलो शक्कर रिकवरी हो रहा है। वहीं मोलासिस उत्पादन 1700 मिट्रिक टन हुआ है। इस सत्र में एक क्विंटल गन्ने की कीमत 230 रूपए है। वहीं पिछले साल की तरह इस बार भी 50 बोनस राशि दिए जाने की संभावना है। क्षेत्र में गन्ने की कमी के चलते कारखाना प्रबंधन दूसरों जिलों से गन्ना मंगाने की तैयारी में है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए गन्ना जरूरी है। हर सीजन में डेढ़ लाख मिट्रिक टन पेराई का लक्ष्य रखते हैं।

पेराई जारी
बालोद। शक्कर कारखाने में गन्ने की पेराई की जा रही है।

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