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कम हाइट से बास्केटबॉल टीम में जगह नहीं पाए तो 40 को वहां पहुंचा दिया

5 वर्ष पहले
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राजेश पटेल...बास्केटबॉल में शानदार खेल के बावजूद भारतीय टीम में सिर्फ इसलिए जगह नहीं मिली कि उनकी हाईट कम (5 फीट 6 इंच) थी। इस बात से काफी दिन तक दिल दुखता रहा, फिर राजेश ने ठान लिया कि खुद नहीं गए तो खिलाड़ियों को वहां तक पहुंचाएंगे। अब तक 15 हजार बालिकाओं को बास्केटबॉल में प्रशिक्षित कर चुके राजेश को छत्तीसगढ़ में इस खेल का भीष्म मान लिया गया है। 40 खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में भी चयनित हुए हैं। 3-4 खिलाड़ी हर साल चुने जा रहे हैं।

हाल ही में इनके प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ की सब जूनियर टीम ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप का खिताब भी जीता है। राजेश के 16 साल के प्रशिक्षण अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ टीम 13 बार नेशनल चैंपियन बन चुकी है। उन्होंने 1985 में बतौर कोच भिलाई में अपना काम शुरू किया था। शेष|पेज 7





मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के उनके तैयार किए गए खिलाड़ी अब तक सब जूनियर, जूनियर और सीनियर कैटेगरी में 52 स्वर्ण पदक, 12 में रजत पदक, 17 में कांस्य पदक जीते हैं। राष्ट्रीय स्पर्धाओं में 401 बालिकाओं ने स्वर्ण पदक, 102 बालिकाओं ने रजत पदक, 97 बालिकाओं ने कांस्य पदक प्राप्त किए हैं। एक कोच के रूप में यह रिकार्ड पूरे देश में राजेश पटेल के नाम है। उनके सिखाई 30 महिला खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ सरकार ने 12 वर्ष में शहीद राजीव पांडे पुरस्कार, 12 खिलाड़ियों को शहीद कौशल यादव पुरस्कार प्रदान किया है। वह खुद पांच एशियन टीम में भारतीय टीम के प्रशिक्षक बनाए गए। राजेश का नाम 2015 में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हुआ है। राजेश अपनी तनख्वाह का 40 फीसदी हिस्सा खेल सुविधाओं पर खर्च करते हैं।



लारा दत्ता बनाएंगी फिल्म

बास्केटबॉल में महिला खिलाड़ियों की सफलता व राजेश पटेल के संघर्ष से प्रभावित होकर लारा दत्ता इस पर फिल्म बनाने वाली है। इसकी अधिकांश शूटिंग भी भिलाई में होगी। कहानी भिलाई की नेशनल प्लेयर रिया सिंह, भारती नेताम, एल दीपा, कविता व सरनजीत की कहानी पर आधारित होगी। लारा इस बारे में राजेश से तीन बार मिल चुकी हैं।



चेन्नई में जीता 13वां खिताब

8 फरवरी को पुडुचेरी में 42वीं सब जूनियर नेशनल बास्केटबॉल चैम्पियनशिप में छत्तीसगढ़ ने तमिलनाडु को हराकर 13वां खिताब जीता।

तम्मना अधुरी फिर भी खुश हूं

इंडियम टीम में सलेक्शन की तमन्ना अधूरी रही। पर इस बात से खुश हूं कि बास्केटबॉल खेल में प्रदेश की लड़कियां सफल हो रही हैं। जिन्हें मैंने सिखाया, उन्हें आत्मनिर्भर देखता हूं तो संतुष्टि मिलती है।’’ राजेश पटेल, प्रशिक्षक गर्ल्स बॉस्केटबॉल



अभी 6 भारतीय टीम में

राजेश से कोचिंग ले चुकीं शरणजीत कौर, कविता, पूनम, रिया सिंह, भारती नेताम व एल दीपा वर्तमान में बॉस्केटबॉल की नेशनल टीम का हिस्सा हैं।



राजेश पूरे कर रहे 3 संकल्प

पहला गरीब परिवार की बालिकाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण।

दूसरा विश्व रैंकिंग में भारतीय टीम को टॉप-थ्री में लाने का है। अभी टीम की वर्ल्ड रैंकिंग चौथी है।

तीसरा संकल्प प्रदेश में बास्केटबॉल के इनडोर स्टेडियम का निर्माण करवाना है।





टूटा घुटना लिए दो साल बिस्तर पर बाद में सैफ गेम्स में जीता सोना

रायपुर |असम में 5 से 9 फरवरी तक साउथ एशियन फेडरेशन (सैफ) गेम्स में खो-खो पहली बार शामिल हुआ और खबर आई कि भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीत लिया। छत्तीसगढ़ के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि टीम की जीत में धमाकेदार परफार्म करनेवाली आलराउंडर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की छात्रा यशोदा साहू रहीं। शेष|पेज 7





खो-खो फेडरेशन समेत कई स्पर्धाओं में बेस्ट प्लेयर रह चुकी यशोदा चार साल पहले खो-खो खेलते समय गिरी और घुटना इस तरह टूटा कि दो साल बिस्तर से उठ नहीं पाई। खेल जीवन समाप्त ही था, लेकिन यशोदा ने भी ठान लिया कि फिर खेलना है। इस जिद ने यशोदा को उस मुकाम पर पहुंचा ही दिया, जहां वह जाना चाहती थी।

छत्तीसगढ़ की टीम से खेलते हुए 24 अक्टूबर 2010 को भिलाई में चल रहे जूनियर नेशनल गेम्स में यशोदा के साथ हादसा हुआ। ऐसी गिरी कि मैदान से स्ट्रेचर पर ले जाया गया। घुटने की हड्डी और लिगामेंट ऐसे टूटे कि दायां पैर हिलता ही नहीं था। सेक्टर-9 के डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया कि आपरेशन यहीं हो जाएगा। पिता घनाराम साहू ने हिम्मत जुटाई और ऑपरेशन सफल तो रहा लेकिन पैर का सही मूवमेंट नहीं था। यशोदा 11 महीने बिस्तर से उठ ही नहीं पाई। गिरते-सं‌भलते करीब डेढ़ साल पहले मैदान पर पहुंची। एक और हादसे के बाद दो महीने फिर बिस्तर पर रहीं, लेकिन हौसला टूटा नहीं। यशोदा दोगुने दम-खम के साथ मैदान पर आईं और अपना मुकाम हासिल कर ही लिया।

इनसे हुआ मुकाबला

असम में 5 से 9 फरवरी तक हुए सैफ गेम्स में बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, भूटान की खो-खो टीमों से हुआ भारतीय टीम का मुकाबला।

राजेश पटेल

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