शंकरनगर पुल अटका, पेमेंट नहीं मिला तो काम छोड़ भागे कर्मचारी
रायपुर | शंकरनगर ओवरब्रिज का काम बुधवार को अचानक बंद कर दिया गया। इस ओवरब्रिज पर काम कर रहे सारे कर्मचारी और मजदूर इसलिए चले गए कि उनका 15 दिन का पेमेंट रुक गया है। इस सूचना से पीडब्ल्यूडी महकमे में खलबली मच गई है क्योंकि पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत ने पुल को चालू करने की डेडलाइन जून अंत तक तय कर दी है। इंजीनियरों का ही मानना है कि इसी तरह चला तो पुल इस साल के अंत तक शुरू हो पाना भी मुश्किल है।
दर्जनभर वार्डों के करीब ढाई लाख लोगों के लिए उपयोगी शंकरनगर ओवरब्रिज के निर्माण में मुसीबतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रिज के रास्ते में अाने वाले मकानों के भूअर्जन का मामला भी गहरा गया है। ब्रिज के दोनों ओर साढ़े तीन से चार मीटर निजी जमीन का अधिग्रहण होना है। इसके बाद ही ठेकेदार रिटर्निंग वाल एवं सर्विस रोेड बनाएंगे। तभी ऊपर का निर्माण शुरू हो पाएगा।
मुआवजा 27 करोड़ : यहां के लोगों ने एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) लेने से मना किया था और जमीन के एवज में मुआवजे की मांग को लेकर कोर्ट चले गए थे। न्यायालय के रूख के बाद पीडब्ल्यूडी ने अब जमीन मालिकों को मुआवजा देने पर राजी हो गया है। विभाग ने मार्च-2015 में ही 27 करोड़ की मुआवजा राशि कलेक्टर के पास जमा कर दिया है। लेकिन जमीन नामांतरण की वजह से राजस्व विभाग भू-अर्जन की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं कर सका है।
जमीन के कागजात से अटका मामला
ब्रिज निर्माण के लिए रेलवे पटरी के दोनों ओर लगभग 35 लोगों की जमीन का अधिग्रहण करना है। लेकिन जमीन के खसरा नंबर को लेकर भू-अर्जन में लगातार देरी हो रही है। जिन लोगों का जमीन इस पुल के लिए लेनी है, जमीन उनके नाम पर ही नहीं चढ़ी है। यहां अनुपम नगर हाउसिंग सोसाइटी ने लोगों को जमीन दी थी। लेकिन अब हो रही जांच में यह बात सामने आ रही है कि किसी के प्लाट पर किसी और का नाम दर्ज है। इसलिए भू-अर्जन में परेशानी आ रही है।
अफसरों ने बताया कि सभी प्रभावित लोगों के मकानों के दस्तावेज मंगवाकर सुनवाई कर चुके हैं, लेकिन मामला सुलझ नहीं पा रहा है।