शराब दुकानों की नीलामी में लाटरी जैसे दांव पर लगाम
प्रशासनिक रिपोर्टर | रायपुर
राज्य में किसी भी शराब दुकान का ठेका अब ऐसे छोटे कर्मचारियों को नहीं मिल पाएगा, जो अपने ठेकेदार के लिए सैकड़ों की संख्या में एक शराब दुकान के लिए आवेदन कर देते हैं और लाटरी निकलने पर दुकान ठेकेदार के हवाले हो जाती है। आबकारी विभाग करोड़ों की शराब दुकानों के आवेदन करने वाले सभी लोगों की संपत्ति का ब्योरा जुटाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि इतना बड़ा निवेश वे लाएंगे कहां से। इससे शराब दुकानों के आवंटन में लॉटरी जैसे दांव पर लगाम लगेगी।
छत्तीसगढ़ में किसी भी शराब दुकान के लिए राज्य के किसी भी जिले से लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जानकारों के अनुसार इस नियम का फायदा उठाकर कई बड़े शराब ठेकेदार अपने कर्मचारियों और परिचितों की ओर से शराब दुकानों के लिए फॉर्म जमा करवाते हैं। शराब दुकानों की लॉटरी में शामिल होने के लिए आवेदक को केवल पांच हजार रुपए की डीडी के साथ ऑनलाइन फॉर्म जमा करना पड़ता है। लॉटरी में दुकान का आवंटन होने के बाद आवेदक को बाकी की रकम नियमानुसार जमा करवानी होती है। यही वजह है कि ठेकेदार बड़ी संख्या में दुकानों के लिए आवेदन जमा करवाते हैं।
हर साल आते हैं पांच से दस हजार फॉर्म : राजधानी की 65 देशी-विदेशी शराब दुकानों के लिए हर साल 5 से दस हजार आवेदन आते हैं। इनमें रायपुर से अलावा दूसरे जिलों से भी आवेदन मिलते हैं। आबकारी विभाग को आवेदनों से ही करोड़ों की कमाई हो जाती थी। यही वजह है कि ऐसे लोगों की संपत्ति का ब्यौरा नहीं लिया जाता था।
लगातार आवेदनों की संख्या बढ़ने की वजह से दुकानों के लिए प्रतियोगिता तेज हो जाती है। इस वजह से बड़े शराब ठेकेदार सिंडीकेट बनाकर काम कर रहे थे। इससे सरकार का राजस्व कम हो जाता था। सिंडीकेट को तोड़ने के लिए आवेदन मिलने के साथी उसकी सभी जानकारी आयकर विभाग को भेज दी जाएगी। इंकम टैक्स के अफसर इस बात की जांच करेंगे कि आवेदक करने वाले के पास एक साल में दस से 20 करोड़ रुपए कहां से आएंगे। आवेदक को कोई बाहरी मदद मिल रही है या नहीं।
इस साल भी आवेदन करने की तैयारी
राज्य के सभी बड़े समूहों ने इस बार भी सिंडीकेट बनाने का फैसला कर लिया है। शराब ठेकेदार आपस में मिलकर जिले की शराब दुकानों का बंटवारा कर रहे हैं। सभी ठेकेदार हजारों की संख्या में आवेदन करेंगे, जिस ठेकेदार के पास जो ठेका आएगा उसे सहमति के आधार पर अदला-बदली कर ली जाएगी। आमतौर पर सभी शराब ठेकेदार अपने कर्मचारियों और परिचितों के नाम पर ही आवेदन करते हैं। यही वजह है कि कई बार इस बात की जानकारी नहीं मिल पाती है कि कौन सी शराब दुकान का संचालन कौन ठेकेदार कर रहा है।
सूची भेजेंगे आईटी को
ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद अफसर इस बात की जांच करेंगे कि आवेदन करने वाले की आय का जरिया क्या है। जितने लोग आवेदन करेंगे उन सभी लोगों की सूची आयकर विभाग को भेज दी जाएगी। आयकर विभाग इस बात की जांच करेगा कि करोड़ों रुपए की दुकानों का आवंटन होने के बाद आवेदक उसके लिए रकम कहां से जुटाएगा।