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भक्तों का संग मोक्ष का खुला दरवाजा है : शारदा महाराज

5 वर्ष पहले
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रायपुर। संग बंधन का हेतु है फिर भी भक्तों का संग मोक्ष का खुला हुआ दरवाजा कहा जाता है, इसलिए प्रथम तो भक्तों का संग करें। यह बात रामसागरपारा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में आचार्य शारदा महाराज ने कही। आगे उन्हों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनके समाज में भगवान की मंगलमयी रसायन भूत कथाएं हुआ करती हैं। उनके श्रवण से शीघ्र ही भगवान में श्रद्धा, रति और भक्ति उत्पन्न हो जाती है। भक्ति द्वारा ऐहिक पारलौकिक विषयों से वैराग्य हो जाता है और चित केंद्रीत हो एक केवल ईश्वर को चाहता है, तब भगवान इसी जन्म में प्राप्त हो जाते हैं और जीव को परम शांति मिल जाती है।

उन्होंने बताया कि भक्ति मुक्ति से बढ़कर है, काल भी उनका बाल बांका नहीं कर सकता। भक्ति के बल पर हनुमानजी आज भी अमर हैं, ध्रुव अटल हैं। मनुष्यों के स्वभाव के गुण के अनुसार भक्ति के भेद अनेक होते हैं। उनमें भी तीन मुख्य हैं तामस, राजस और सात्विक। भक्ति नौ प्रकार की कही गई है। संतों का संग प्रथम भक्ति है, भगवान के कथा श्रवण करना द्वितीय भक्ति है।



भागवत और श्रीरामचरित मानस में वर्णित नवधा भक्ति पर उन्होंने विस्तार से बात रखी।

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