दस साल से लड़ रहे थे जमीन के लिए अपना हिस्सा लेकर लौटे भाई-बहन
रायपुर। पैतृक संपत्ति के लिए दस साल से कोर्ट का चक्कर लगा रहे सात भाई-बहन को शनिवार को निचली अदालत से राहत मिली। सात भाई-बहन और उनकी मां को कोर्ट ने उनका हिस्सा दिलाया। सुबह जहां वे एक दूसरे की ओर देख भी नहीं रहे थे, दोपहर को फैसले के बाद वे एक दूसरे से नजरें मिलाते हुए और हंसते हुए कोर्ट से निकले। राष्ट्रीय लोक अदालत में 4970 मामले रखे गए थे। 17 बैंकों ने स्टाल भी लगाया था। दिनभर सुनवाई के बाद सैकड़ों प्रकरण सुलझाए गए। सोनकर पारा निवासी नेतराम सोनकर के पिता शहर के कई स्थानों पर पुश्तैनी जमीन का बंटवारा संतानों के बीच नहीं कर पाए थे। इसी बीच उनका निधन हो गया। उनकी रिंगरोड में 75 और 15 डिसमिल, कुशालपुर में मकान, अमलेश्वर में तीन एकड़ जमीन, पुरानी बस्ती में 800 वर्ग फीट में बना मकान, सोनकर पारा में 2100 वर्ग फीट जमीन और करीब सवा एकड़ जमीन थी। उनके निधन के बाद नेतराम और उनके छोटे भाई यदुराम सोनकर और बहनों धनमत, अंबिका, रामकली, कांति बाई व शिवकुमारी के बीच जमीन और उसकी कीमत को लेकर विवाद हो गया।
इसमें उनकी मां सुखमा बाई का भी एक हिस्सा था। मामला कोर्ट तक पहुंचा। दस साल तक विवाद चलता रहा, लेकिन उसका कोई हल नहीं निकल रहा था। इस पर शनिवार को लगे राष्ट्रीय लोक अदालत में पीठासीन अधिकारी कुमारी सरोजनी परमार ने सात भाई-बहनों और उनकी मां को समझाया। इसके बाद सभी का बराबर हिस्सा किया गया। जमीन और स्थान के हिसाब से उसकी कीमत लगाई गई। इसी आधार पर सात भाई-बहन और उनकी मां के बीच आठ हिस्से कर बांटा गया।
11-12 साल पुराने दो मामले भी निबटे
राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को एक 11 साल और एक 12 साल पुराना मामला निबटा। 2002 में स्वरोजगार योजना के तहत लाखेनगर निवासी राजकुमार शर्मा ने यूको बैंक से लोन लिया था। लोन की किस्त नहीं जमा करने की वजह से ब्याज समेत यह राशि बढ़कर 63036 रुपए तक पहुंच गया था। बढ़ते ब्याज को देखते हुए शर्मा ने लोन की राशि जमा करने से इनकार कर दिया था। इस पर बैंक ने कोर्ट में याचिका लगाई थी। दोनों को बुलाकर समझाया गया। इस पर दोनों के बीच राजीनामा हुआ और शर्मा ने लोन की राशि बैंक में जमा कर दी। इसी तरह भनपुरी के विजयेंद्र शुक्ला ने भी 2003 में यूको बैंक से स्वरोजगार के लिए लोन लिया था। कुछ किस्त जमा की, इसके बाद कई किस्त जमा नहीं की। राशि बढ़कर 80,275 रुपए तक पहुंच गई। दोनों को राजीनाम कर मामले को सुलझाया गया।