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पेट के कीड़े मारने की दवा खाने से प्रदेश के 93 बच्चे बीमार

5 वर्ष पहले
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रायपुर. कृमि मुक्ति दिवस (नेशनल डी-वॉर्मिंग डे) पर स्कूली बच्चों को एलबेंडाजॉल नामक दवा खिलाई गई। इससे प्रदेशभर में करीब 93 बच्चे बीमार पड़ गए। दवा पीने के बाद कुछ बच्चे उल्टियां करने लगे जबकि कुछ ने पेट दर्द की शिकायत की। इन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
राज्य में स्वास्थ्य विभाग ने नेशनल डी-वॉर्मिंग डे पर करीब 21 लाख बच्चों को दवा देने का लक्ष्य रखा था। 80 प्रतिशत यानी करीब 17 लाख का लक्ष्य हासिल भी किया गया।
- कृमिनाशक दवा से जांजगीर जिले के तलदेवरी व गदामोर गांव में 40 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई।
-दुर्ग जिले में 5 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई।
-बैकुंठपुर के सलवा गांव में के प्राइमरी व मिडिल स्कूल में 12 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें एक की दशा गंभीर है।
-बस्तर के बकावंड ब्लॉक में चार बच्चे बीमार पड़ गए।
- कोंटा के पास ढोंढरा कन्या आश्रम व प्राइमरी स्कूल में दवा खाने के बाद बेचैनी की शिकायत के बाद डेढ़ दर्जन बच्चे अचेत हो गए। जिसके बाद मौके पर हड़कंप मच गया। 12 बच्चों की तबीयत कुछ देर में ठीक हो गई, जबकि 6 को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
-जबकि बालोद जिले के गुंडरदेही में 14 छात्रों की तबीयत बिगड़ गई।
-सरगुजा में 10 छात्र बीमार हुए हैं। जांजगीर-चांपा कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि उन्होंने सभी बच्चों को मध्याह्न भोजन के बाद कृमिनाशक टेबलेट देने के निर्देश दिए थे। टेबलेट खाली पेट बच्चों को नहीं दी जाती।

खाली पेट दवा लेने से दुष्प्रभाव
राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. अमर ठाकुर ने बताया कि दवा का साइड इफेक्ट तभी होता है जब बच्चे खाली पेट रहते हैं। इसमें सिर दर्द, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत होती है। राज्य में दवा देने के बाद जितने बच्चों की तबीयत बिगड़ी है वे सभी खाली पेट रहे होंगे। फिलहाल सभी बच्चे स्वस्थ हैं।
पूरे देश में जगह-जगह शिकायत
नेशनल डी-वॉर्मिंग डे पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने 500 जिलों के 27 करोड़ बच्चों को दवाई देने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 9 करोड़ से ज्यादा है।
-राजस्थान में 200, मध्यप्रदेश में 300, बिहार में 180 और छत्तीसगढ़ में भी सौ से ज्यादा बच्चे दवा खाने के बाद बीमार हो गए।
-हरियाणा के सोनीपत में 16 स्कूली बच्चे बीमार पड़ गए।
-उत्तरप्रदेश के आगरा में भी कई बच्चों ने चक्कर आने की शिकायत की।
पंजाब में पूरी दवाओं का स्टॉक नहीं आने से इसका वितरण रोक दिया गया। डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों को दी जाने वाली दवाई विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणित है और इसके बहुत कम साइड इफेक्ट होते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अमूमन इस दवा को खाली पेट नहीं लिया जाना चाहिए।
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