रायपुर. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के बीच लगातार दूसरे दिन हंसी-ठिठोली के साथ एक दूसरे की तारीफों का सिलसिला चला। टीएस सिंहदेव ने हंसते हुए कहा कि मैं मुख्यमंत्री की व्यवहारकुशलता की तारीफ करता हूं और उनसे रिश्ते सार्वजनिक करता हूं तो लोग गलत अर्थ निकालते हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने भी चुटकी लेते हुए उनकी तारीफ की।
उन्होंने कहा कि टीएस मेरे अच्छे मित्र हैं पर अपने रिश्तों को छिपाना चाहते हैं। वे इतने अच्छे हैं कि अगले पांच साल भी नेता प्रतिपक्ष की भूमिका बखूबी निभा सकते हैं। दोनों नेताओं ने शनिवार को रायपुर में क्षत्रिय समाज के कार्यक्रम में मंच साझा किया।
इससे पहले शुक्रवार को दोनों के बीच अंबिकापुर के सरकारी कार्यक्रम में इसी तरह की बातें हुई थीं। हालांकि उनके रिश्तों पर सबसे पहले बात की महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह ने। उन्होंने कहा कि रमन और सिंहदेव के बीच तालमेल अच्छा है। दोनों अच्छा काम कर रहे हैं। एक ही समाज के हैं इसलिए उनमें बेहतर तालमेल है।
उसके बाद टीएस की बारी आई तो उन्होंने आज अंबिकापुर से थोड़ा टोन बदला और कहा- मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह मिलनसार और व्यवहारकुशल हैं। राजनीति में व्यावहारिकता महत्वपूर्ण है। राजनीति में व्यवहार के बाद काम महत्वपूर्ण होता है। काम ही किसी भी राजनेता को स्थापित रखता है। मेरे जीवन में मूल्यों और विचारों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
एक व्यवहारकुशल व्यक्ति के नाते मुख्यमंत्री की तारीख करता हूं लेकिन कल मैं यह समझूंगा कि मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए तो उनसे इस्तीफे की मांग भी करूंगा। ऐसा मैं तथ्यों और सुबूतों के आधार पर करता हूं और करुंगा। मेरे और मुख्यमंत्री के संबंधों को सार्वजनिक इसलिए नहीं करना चाहता क्योंकि कुछ लोग इसका गलत उपयोग करते हैं और अर्थ निकालते हैं।
मुख्यमंत्री की बारी आई तो उन्होंने भी खुले दिल से सिंहदेव की तारीफ की। रमन ने कहा-टीएस मेरे अच्छे मित्र हैं। हालांकि सार्वजनिक तौर पर इसका जिक्र करने से वे मना करते हैं। क्योंकि उनके अनुसार कुछ लोग इसका दूसरा अर्थ निकालने लगते हैं। वैसे टीएस विपक्ष की भूमिका अच्छे से निभा रहे हैं और वे इसके बाद अगले पांच साल भी यह जिम्मेदारी बखूबी निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम दोनों ही अलग-अलग विचारधाराओं की राजनीति कर रहे हैं। सिर्फ विचार में अंतर है। काम साथ में कर रहे हैं। आगे यह जनता तय करती है कि किसे नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जाए।
सीएम ने कहा कि समाज सिर्फ कलम न भेंट करे। कलम के साथ किताबें भी भेंट की जानी चाहिए क्योंकि बिना किताब के बिना कलम अधूरा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बस्तर राजा प्रवीरचंद भंजदेव, बैरिस्टर छेदीलाल, ठाकुर प्यारे लाल सिंह, आरसी सिंहदेव और जशपुर राजा दिलीप सिंह जुदेव का नाम लिया।
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री कृपाशंकर सिंह ने कहा कि आजादी के बाद एकजुटता की कमी ने समाज को आगे बढ़ने से रोका है। समाज अब एकजुट हो रहा है। सांसद रणविजय सिंह ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राघव राजू, महासचिव विनय सिंह भदौरिया, कमल भंजदेव, संगठन सचिव शशि सिंह सहित समाज के तीन हजार से ज्यादा लोग उपस्थित रहे।
तलवार नहीं कलम देगा क्षत्रिय समाज
क्षत्रिय समाज अब किसी कार्यक्रम या समारोह में लोगों को सम्मानित करने के लिए प्रतीक स्वरूप में तलवार नहीं देगा। तलवार के बजाए कलम भेंट किया जाएगा। आल इंडिया क्षत्रिय फेडरेशन के नौवें राष्ट्रीय सम्मेलन में इसकी घोषणा की गई।
फेडरेशन का कहना है कि तलवार का दौर गुजर गया। अब कलम यानी पेन उठाने का समय है। शनिवार को रविवि प्रेक्षागृह में आयोजित सम्मेलन में देश के कई राज्यों से फेडरेशन से सदस्य और पूरे छत्तीसगढ़ से समाज के लोग शामिल हुए।
इस अवसर पर फेडरेशन ने समाज के पांच लोगों को सम्मानित किया। इनमें सरगुजा जिले के लखन सिंह, रायपुर की ईला कलचुरी, भोपाल के पीएस भदौरिया, उड़ीसा से डा. एमएस राजू और हरियाणा के डा. प्रताप चौहान का कलम भेंटकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि मेधावी लेकिन आर्थिक विपन्नता के कारण शिक्षा से वंचित बच्चों को फेडरेशन मेडिकल और इंजीनियिरंग की निशुल्क शिक्षा दिला रहा है। छह से सात लाख रुपए खर्च वाले आईएएस की की कोचिंग महज 60 हजार रुपए में दिलाई जा रही है।