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  • कांग्रेस नेताओं ने बिजली महंगी करने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया

लगातार दूसरे साल बिजली महंगी करने के खिलाफ जुटी कांग्रेस

5 वर्ष पहले
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रायपुर. घरेलू बिजली दरों को लेकर विनियामक आयोग में बुधवार को दोपहर हुई सुनवाई में मौजूद लोगों, खासकर कांग्रेस नेताओं ने बिजली महंगी करने के प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया है। जनसुनवाई में कहा गया कि पिछले साल भी घरेलू बिजली महंगी हुई थी, इसलिए इस साल ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

आयोग के दफ्तर में अध्यक्ष नारायण सिंह और सदस्य वीके श्रीवास्तव ने जनसुनवाई शुरू की। महापौर प्रमोद दुबे ने शुरुआत करते हुए कहा कि बिजली कंपनियां लाइन लॉस कम नहीं कर पा रही हैं। छत्तीसगढ़ में प्रचुर प्राकृतिक संपदा है, इसलिए यहां के लोगों को सस्ती बिजली दी जानी चाहिए।
ऐसा करने के बजाय बिजली कंपनियों के नुकसान का बोझ आम लोगों पर डाला जा रहा है। पूर्व विधायक रमेश वर्ल्यानी ने कहा कि विद्युत नियामक अधिनियम 2003 के तहत टैरिफ 20 फीसदी तक बढ़ाने का प्रावधान है, जबकि यहां 40 फीसदी तक बढ़ाया गया है।
नौ साल में 12 बार बिजली महंगी की गई है। यह लोगों के साथ अन्याय है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष विकास उपाध्याय ने कहा कि पुराने स्लैब को सुधार कर 0 से 400 यूनिट तक किया जाए। 201 से 600 यूनिट तक की रेंज को 800 यूनिट तक बढ़ाया जाए।
विद्युत शुल्क और उपकर में से किसी एक को ही लिया जाए। अतिरिक्त सुरक्षा निधि को भी किस्तों में लिया जाए। पूर्व बिजली कर्मचारी नेता एमए इकबाल ने 1973 करोड़ घाटे की बात को वितरण कंपनी की लापरवाही बताई और कहा कि पांचों कंपनियों की पहले की तरह इंटरनल आडिट की जाए।
एमआईसी सदस्य सतनाम पनाग ने कहा कि 12 साल में पांच फीसदी महंगाई बढ़ी है, लेकिन बिजली दर 3 गुना ज्यादा हो गई है। बोझ आम आदमी पर डालना ठीक नहीं है।
कांग्रेसियों ने किया प्रदर्शन
जनसुनवाई के दौरान पार्षद एजाज ढेबर और उनके समर्थकों ने आयोग के दफ्तर के सामने लालटेन लेकर प्रदर्शन किया। वे महंगी बिजली नहीं चलेगी का नारा लगा रहे थे। जनसुनवाई में पूर्व महापौर किरणमयी नायक को भी बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचीं। धमतरी के एक व्यक्ति सुनवाई समाप्त होने के बाद पहुंचे तो सदस्य श्रीवास्तव ने अपने कक्ष में उनकी बात सुनी।
आज सुनेंगे किसानों को
जनसुनवाई में सुबह 10 से 12 बजे लघु उद्योग संचालकों की बातें सुनी गईं। उन्होंने भी प्रति यूनिट बिजली दर बढ़ाने का विरोध किया। इससे आर्थिक बोझ बढ़ने की बातें कही। गुरुवार को सुबह 10 बजे से किसानों की बात सुनी जाएगी। दोपहर 3 बजे से ट्रेड यूनियन और पब्लिक यूटिलिटी सेंटर अपना पक्ष रखेंगे।
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