ऐसा है पूरा मामला
- कोर्ट ने उन्हें एमपी सिविल सर्विस के स्पेशल प्रोव्हिजन फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ वुमन 1997 के तहत उम्र में 10 साल की छूट दी है।
- ऋचा के मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस एके सीकरी और अभय मनोहर की बेंच ने यह फैसला दिया।
नियमों के आड़े आने से नहीं बन पा रहीें थीं डीएसपी
- ऋचा ने बताया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में पीएससी-2006 का एग्जाम दिया था।
- एग्जाम पास करने के बाद उन्होंने पीएससी मेन्स का एग्जाम भी पास किया और इंटरव्यू के बाद उनका सिलेक्शन डीएसपी के लिए हो गया।
- लेकिन यहां एक सरकारी नियम आड़े आया, जिसके तहत महिलाओं को एेज लिमिट की जो छूट मिलनी चाहिए थी, स्टेट गवर्नमेंट ने वह छूट देने से मना कर दिया।
क्या है एज लिमिट का नियम
- छत्तीसगढ़ बनने से पहले से एमपी में 1997 से महिला आयु सीमा छूट चली आ रही थी।
- साल 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद इन नियमों को 1997 के सेवा नियमों से अलग रखा गया।
- ऋचा को उस वक्त गहरा धक्का लगा जब मेरिट लिस्ट में उनसे नीचे के लोग डीएसपी बना दिए गए और उन्हें रोक दिया गया।
काेर्ट ने और क्या कहा
- ऋचा ने बताया कि हाईकोर्ट ने फैसले में राज्य सरकार को ऑर्डर दिया कि उन्हेें 2006 की सिलेक्शन लिस्ट के मुताबिक ही पोस्ट दी जाए।
- इसके साथ ही जो लोग इस लिस्ट में उनसे नीचे रहने पर भी पाेस्ट किए गए, उन्हें उनसे सीनियरिटी दी जाए।
- कोर्ट ने कहा कि वे इन सालों की सैलेरी के लिए दावा नहीं कर सकेंगी, लेकिन इसके अलावा बाकी तमाम बातों के लिए उनकी सीनियरिटी सिलेक्शन लिस्ट की पोस्टिंग की तारीख (10 बरस पहले) से मानी जाए।
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