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रायपुर के मौसम केंद्र में लगेगा वेदर डॉप्लर राडार, 30 करोड़ की लागत आएगी

6 वर्ष पहले
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रायपुर. देश के चुनिंदा महानगरों के बाद अब जल्दी ही वेदर डॉप्लर राडार के सटीक पूर्वानुमान मिलने लगेंगे क्योंकि 30 करोड़ रुपए का यह सिस्टम जल्दी रायपुर में लगने जा रहा है। मौसम के लिहाज से छत्तीसगढ़ सेफ जोन में है, यानी तूफान और दूसरे खतरे कम हैं। यहां मानसून और गर्मी को लेकर ही लोगों की जिज्ञासा ज्यादा रहती है। डॉपलर राडार लगने के बाद इन मौसमों की हर घंटे-दो घंटे में सही जानकारी प्रसारित होगी।
इसका इस्तेमाल यूएस-कनाडा में बहुत अधिक हो रहा है, क्योंकि वहां विनाशकारी तूफान आते हैं। तूफान-बारिश के पूर्वानुमान के बारे में इसे विशेषज्ञ काफी सटीक मान रहे हैं। यह राडार जल्दी ही राजधानी के लालपुर मौसम केंद्र में स्थापित होगा। करीब 32 मीटर की ऊंचाई पर लगने वाला यह राडार ढाई सौ किलोमीटर परिधि (रेडियस) में मौसम की कोई भी हलचल भांपकर उसकी जानकारी दे देगा।
इस केंद्र के विशेषज्ञों को अभी मौसम का हाल जानने के लिए उपग्रह और दूसरे नजदीकी राडार से इनपुट लेना पड़ता है। यह सटीक तो होता है, लेकिन यहां राडार लगने से पूर्वानुमान बेहद पुख्ता तथा सीमित अवधि के लिए हो जाएगा।
मानसून हो, तूफानी बारिश हो, गर्मी या ठंड...छत्तीसगढ़ के लोगों को अगले कुछ महीने के भीतर हर घंटे के मौसम की सटीक जानकारी मिलने लगेगी। इसकी वजह बनेगा वेदर डॉपलर राडार। केंद्र सरकार ने रायपुर में इस राडार को लगाने के लिए 30 करोड़ रुपए मंजूर कर लिए हैं। जल्दी ही लालपुर मौसम केंद्र में राडार का काम शुरू हो जाएगा।
1. बरसात
डॉप्लर राडार यह बता सकेगा कि ढाई सौ किमी के दायरे में किस घंटे में कितनी बारिश होगी। इस दायरे में जो बादल सक्रिय हैं, वह कितना पानी और कहां-कहां बरसाएंगे। छत्तीसगढ़ में किसानी ही नहीं, कारोबारी जगत के लिए भी यह बेहद उपयोगी साबित होगा।

2. गर्मी
रायपुर में अप्रैल-मई में .तापमान 45 डिग्री से ऊपर जाता है। इसके बाद एक-एक डिग्री को लेकर उत्सुकता रहती है। लोगों की पूरी दिनचर्या मौसम के हिसाब से तय होने लगती है। डॉपलर राडार सटीक इनपुट देगा कि दिन के कौन से घंटे में तापमान कितना रहेगा।

3. सर्दी
छत्तीसगढ़ में उत्तरी हवा के असर से ठंड पड़ती है। बीच-बीच में दूसरे सिस्टम से हवा की दिशा बदलती है और तापमान कम-ज्यादा होता रहता है। रोजाना के ये परिवर्तन इससे बताए जा सकेंगे, ताकि तेज सर्दी में परिवार अपनी सुरक्षा का इंतजाम पहले ही कर लें।
प्रस्ताव वित्त मंत्रालय में
केंद्र सरकार के पृथ्वी मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के रायपुर समेत देश में आधा दर्जन जगहों के लिए इस राडार को मंजूरी दे चुका है। इसके लिए मौसम विभाग से प्रस्ताव मांगा गया था। लालपुर मौसम केंद्र रायपुर के निदेशक एमएल साहू ने बताया कि यहां से भेजा गया प्रस्ताव मंजूरी के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में पहुंच गया है।
काम करने का तरीका
मौसम विज्ञान के क्षेत्र में डापलर राडार का उपयोग डाटा संकलन करने में किया जाता है। यह 250 किमी रेडियस में हवा से जुड़े सारे डाटा देता है। जैसे, तूफान आ रहा है तो उसकी रफ्तार कितनी है, हवा किस गति से चल रही है, कितनी बारिश होगी वगैरह। राडार से एक विशेष तरंगें निकलती हैं तो संबंधित सिस्टम से टकराकर कंट्रोल रूम में वहां के हालात की कलरफुल इमेज लगातार बनाती रहती हैं। इससे पूर्वानुमान आसान हो जाता है।
इनके लिए उपयोगी
-एविएशन
-साउंड सैटेलाइट
-मेटीरियोलॉजी
-रेडियोलॉजी
-हेल्थ केयर
वेदर डॉप्लर राडार के बारे में
मीटर की ऊंचाई पर
सतह से करीब 32 मीटर ऊंचाई पर राडार लगाया जाएगा। 25 मीटर ऊंचा प्लेटफार्म बनेगा। राडार का स्ट्रक्चर 7 मीटर ऊंचा रहेगा। गुब्बारे जैसा गोल राडार इसी सिस्टम में सबसे ऊपर रहेगा।
करोड़ रु. तक खर्च
राडार का पूरा सिस्टम 20 करोड़ रुपए का होगा। इसके अलावा 32 मीटर यानी करीब 100 फीट ऊंची बिल्डिंग बनानी होगी। एक कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा, जिसमें राडार सूचनाएं देगा।
किमी के दायरे में
डापलर राडार अपने चारों तरफ करीब 250 किमी के दायरे (रेडियस) में मौसम का हाल हर घंटे बताएगा। चक्रवात या तूफान किस गति से किधर जा रहा है, कितना नुकसान होगा, सब सूचना देगा।
शहरों में ऐसा राडा
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों के अलावा वेदर डॉपलर राडार बेहद जरूरत वाले शहरों अगरतला, हैदराबाद, जयपुर, मोहनबारी, माचिपट्टनम, नागपुर, पटियाला, पटना और वाल्टेयर में हैं।
तूफानों की जानकारी
देश में 2013 में पाइलीन, 2014 में लैला और हुदहुद की इस राडार ने सटीक जानकारी दी, इसलिए ये तबाही नहीं मचा पाए। अमेरिका, कनाडा, जापान जैसे देशों में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है।
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