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1 साल के मासूम के सामने पिता, मां, दादी-चाची की मौत, ऐसे पढ़ी थी लाशें

4 वर्ष पहले
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बालोद (रायपुर). जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर गुरुर ब्लाॅक का सोरर गांव। शुक्रवार सुबह 6.30 बजे करंट लगने से यहां पटेल परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। मतृकों में घर के मुखिया सत्यनारायण पटेल (37), उनकी मां राजबाई पटेल (57), पत्नी डामिन बाई (30) और भाई की पत्नी चित्ररेखा बाई (25) शामिल हैं। बता दें कि इस दुर्घटना में बहन नेहा की वजह से रुद्र (1) बाल-बाल बच गया। गांव वाले उठा रहे पूरे खर्च...
 
- अंतिम संस्कार से लेकर संपूर्ण कार्यक्रम का खर्चा गांव वाले उठा रहे है। पटेल मरार समाज ने 12 हजार रुपए की सहयोग राशि जुटा कर अंतिम संस्कार कराया। 
- डिप्टी कलेक्टर आनंदरूप तिवारी ने कहा कि राजस्व से नहीं बल्कि विद्युत कंपनी से ऐसे केस में मुआवजे का प्रावधान है। एक व्यक्ति पर अधिकतम दो लाख मिलते हैं। 
- घटना के बाद परिवार को प्रशासनिक सहयोग का इंतजार है। विधायक भैया राम सिन्हा ने अपनी ओर से लकड़ी और चावल दिया है। 
- साथ ही उन्होंने बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्चा भी उठाने की बात कही है। 
 
 
इन दो बच्चों ने घरवालों को मरते देखा... 
 
- कक्षा दूसरी में पढ़ने वाली नेहा व चौथी में पढ़ने वाले ढालेंद्र ने अपनी आंखों के सामने अपनी मां, पापा, दादी और चाची (रुद्र की मां) को दम तोड़ते देखा है। 
- दोनों को जब भी वह मंजर याद आता है तो दोनों फूट-फूटकर रो पड़ते हैं। शुक्रवार सुबह 6.30 बजे दोनों भाई बहन घर के आंगन में खेल रहे थे। 
- अचानक बाड़ी की ओर जाने वाले बरामदे से छोटे भाई रुद्र के रोने की आवाज आई तो दोनों दौड़कर वहां गए। 
- नेहा ने रुद्र को गोद मे उठाया और जैसे ही बाड़ी की तरफ देखा तो उसके सामने उसकी मां डामिन बाई, पापा सत्यनारायण, दादी राजबाई और चाची चित्रलेखा (रुद्र की मां) जमीन पर गिरे पड़े थे। 
- चाची की अंतिम सांसें चल रही थीं। बच्चे पड़ोसियों को बुलाने गए, लेकिन जब तक पड़ोसी कुछ कर पाते चारों की जान जा चुकी थी। 
 
अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट में उमड़ी भीड़, रो पड़ा पूरा गांव 
 
- पोस्टमार्टम के बाद गांव वालों ने चारों के अंतिम संस्कार का प्रबंध किया और श्मशान घाट पहुंचे। 
- एक साथ चार चिताएं जलीं और इस दौरान लोगों की भीड़ के चलते गांव का श्मशान भी छोटा पड़ गया। 
- अंतिम संस्कार के समय गांव के करीब 3 हजार लोग वहां मौजूद थे। दुख की इस घड़ी में गांव के सभी लोग एक साथ दिखे। 
- गांव वाले पीड़ित परिवार की मदद के लिए सामने आए। गांव के पुनीत राम पटेल, माखन लाल पटेल, युधिष्ठिर साहू ने बच्चों की पूरी मदद करने की बात कही। 
 
ऐसे हुआ था हादसा
 
- आशीष तिवारी, गुरूर टीआई  के मुताबिक सत्यानारायण के घर से लगी बाड़ी में एक कुआं है। कुएं से पानी निकालने के लिए टिल्लू पंप लगा है। उसी पंप में लगा बिजली का तार एक जगह से कटा था। 
- शुक्रवार सुबह डामिन बाई ने कपड़े सुखाने के लिए पंप के तार पर डाले। गीले कपड़े तार के कटे हुए हिस्से के संपर्क में आ गए और डामिन को करंट से लग गया। 
- वह चीखने लगी, आवाज सुनकर सास राजबाई उसे बचाने आई। सास ने बिना किसी सुरक्षा के उसे बचाना चाहा इस वजह से वह भी करंट की चपेट में आ गई।
- दोनों की चीखें सुनकर सत्यनाराण और चित्रलेखा बचाने दौड़े। लेकिन उन्होंने भी बिना किसी सुरक्षा के बचाना चाहा। 
- एक के बाद एक वे दोनों भी करंट की चपेट में आ गए। 
 
आगे की स्लाइड्स में देखें, घर की फोटोज...
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