पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • गुदुम तक ट्रेन पहुंचने के बाद अब हो रहा शिक्षा का विस्तार

गुदुम के 197 लोग एक-एक हजार रुपए जमा करेंगे ताकि बेटियां पढ़ सकें

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रायपुर/ भिलाई. गुदुम तक ट्रेन पहुंचने के बाद अब शिक्षा का विस्तार जरूरी है। गुदुम के लोग न केवल इसे महसूस कर रहे हैं, बल्कि बदलाव की इस राह को आकार देने की कोशिशों में जुट गए हैं। गांव की कोई भी बेटी अभावों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न हो जाए, इसके लिए 197 लोगों का एक ग्रुप तैयार हो गया है। हर सदस्य द्वारा 1 हजार रुपए दान कर एक कोष तैयार किया है। वे क्षेत्र के हर उस बच्चे की मदद करेंगे जो उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना चाहते हैं।
गुदुम में 1 फरवरी को ट्रेन पहुंची है। यहां के लोगों को पहले से पता था कि ट्रेन इलाके में बदलाव और सहूलियतें लेकर आएंगी। उन्होंने महसूस किया कि बदलाव को आकार देने के लिए शिक्षा जरूरी है। अब बारी थी इस विचार को आकार देने की। तो 3000 हजार की आबादी वाले गुदुम के 197 उच्चशिक्षित लोगों ने इसका बीड़ा उठाने की ठानी।
ये 197 लोग गुदुम के हैं। प्रदेश के विभिन्न इलाकों में कोई डॉक्टर, इंजीनियर है तो कोई सरकारी विभाग और प्राइवेट कंपनियों में काम कर रहे हैं। ये सभी एक प्रकोष्ठ के माध्यम से एकजुट हुए। इन्हें एक मंच पर लाने में चुन्नीलाल गोंड़ की भूमिका अहम रही।
लोगों के दिमाग में यह विचार जनवरी में दल्ली से गुदुम होते हुए जगदलपुर और रायपुर तक ट्रेन शुरु किए जाने की खबर के साथ आया। दो माह पहले बने इस ग्रुप ने उसी दिन सोचा कि अब अपने गांव की बेटियों को वनांचलों से बाहर चकाचौंध भरे शहरों में शिक्षा दिलवाकर मुख्यधारा में लाकर खड़ा करेंगे।

प्रत्येक सदस्य ऐसे करता है मदद: प्रकोष्ठ से जुड़े सभी 197 शिक्षित यानि नौकरीपेशा से जुड़े सदस्य एक-एक हजार रुपए आर्थिक मदद के लिए साल में एक बार जुटा रहे हैं। इस रकम से आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया जाएगा। इंजीनियरिंग, आईटीआई, मेडिकल सहित हायर एजुकेशन की दिशा में गांव को आगे ले जाना है।

गांव में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से दूर होते जा रहे थे। आर्थिक तंगी की वजह से संभव नहीं है कि वे सैकड़ों रुपए खर्च कर जा सकें। अब चंद पैसे में ही रिश्तेदारों का दायरा भी बढ़ेगा। निश्चित रूप से शिक्षा, चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से काम शुरू किया जा सकेगा।
दानेश्वरी कोठारी, सरपंच-गुदुम
फैक्ट फाइल-
गुदुम एक झलक

95 प्रतिशत: हलबा जाति की आबादी
1000 हजार: मतदाता
3000: गांव की आबादी
80 : परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा
287: गांव में घरों की संख्या
60: रेलवे में अलग-अलग पद पर गांव के लोग
ट्रेन का साथ मिला तो विश्वास को लगे पंख
गांव के कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने अब तक ट्रेन देखी तक नहीं था। ट्रेन पहुंची तो उनकी बूढ़ी आंखों की रोशनी में बच्चों के भविष्य की चमक नजर आई। बस अब इंतजार है कि यह ट्रेन जल्द से जल्द भानुप्रतापपुर होते जगदलपुर तक पहुंचे।
फिर गांव की तस्वीर को बदलने की मुहिम का असर देखने को मिलेगा। फिलहाल, यहां के कुछ बच्चे रायपुर और भिलाई में रहकर पढ़ रहे हैं, जो महीने में कभी-कभी घर पहुंचते थे। अब इस ट्रेन के जरिए वह नियमित आ-जा सकेंगे।
एेसे पनपा यह विचार
प्रकोष्ठ के पदाधिकारी व भरीतोला हॉस्टल के अधीक्षक चुन्नी लाल गौंड बताते हैं कि यहां, बेटियों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में भेजना तो दूर घर से बाहर भी नहीं निकलने दिया जाता था। यही वजह है कि आज तक यहां सिर्फ और सिर्फ एक हाईस्कूल है।
10वीं तक पढ़ाई के बाद बच्चियों का भविष्य घरवालों के विवेक पर निर्भर होता है। कुछ पहल करते तो कुछ संकोच में ही पढ़ाई छोड़ जंगलों तक सीमित हो जाते हैं। लेकिन जब गुदुम तक ट्रेन के रुप में विकास पहुंचा तो गांव के पढ़े लिखे और जागरुक लोगों ने मिलकर एक सशक्त मंच तैयार कर लिया।
खबरें और भी हैं...