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  • नौकरी की दौड़ से खुद को अलग कर युवाओं ने खेती को अपनाया

ग्रेजुएशन कर किसानी में जुटे युवा, सूखे के बाद भी हुई अच्छी फसल

5 वर्ष पहले
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रायपुर/ महासमुंद. आठ सौ की आबादी वाले गांव जीवतरा का हर युवा पढ़ा-लिखा है और किसानी कर रहा है। उन्होंने ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री बेहतर अंकों के साथ हासिल की, लेकिन सरकारी नौकरी की चाहत वाली भीड़ से खुद को अलग कर यहां के 80 फीसदी युवाओं ने गांव और पुश्तैनी कारोबारी यानी सीधे तौर पर कहें तो खेती को अपनाया है।
किसानी के काम में ऐसी दिलचस्पी कि सूखे के बाद भी बेहतर फसल ले रहे, और इसी व्यस्तता के चलते पूरे गांव को विवादों से दूर रखने में भी अभी तक वे सफल हुए हैं। विवादों को गांव में जगह नहीं मिले के पीछे युवा खुद को नशाखोरी से दूर रखना बताते हैं, वे इसके खिलाफ अभियान भी चला रहे हैं।
मिश्रित जातियों के दो सौ परिवारों वाले इस गांव के विकास के लिए बुजुर्गों ने जो रणनीति वर्षों से बना रखी है उसी का पालन करते हुए युवा निर्णयों में पंच परमेश्वर की भूमिका को बनाए रखे हैं।
पंचायती राज की विकास गाथा का बेहतर उदाहरण इस गांव में देखने को मिला है ग्रामीणों का कहना है कि समय पर युवाओं को गांव के संचालन का जिम्मा दे दिया जाता है और साठ साल के बाद गांव के बुजुर्ग रिटायर होने की बात कहते हुए गांव के निर्णयों में युवाओं को आगे कर अपने अनुभव ही बताते हैं।
यहां प्राइमरी स्कूल है, लेकिन 30 किलोमीटर का सफर कर जिला मुख्यालय तक उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं।

सालों से गांव की सफाई पर खास ध्यान
सफाई पर इस गांव के लोग पहले से ही सजग हैं। रेखराम ने बताया कि यही कारण है गांव में किसी बीमारी का ज्यादा प्रकोप नहीं फैलता। गांव की गलियाें में एक भी कचरा नजर नहीं आता है। यह सब गांव के युवाओं की मेहनत के कारण संभव हो सका है। गांव के चारों ओर जंगल होने के बाद भी हाईटेक है और संचार के पर्याप्त साधन हैं। हैंडपंप और नलजल योजना जलापूर्ति का साधन है। सार्वजनिक नल भी गांव में लगाए गए है।

सात सौ लीटर दूध का उत्पादन, पर बेचते नहीं
सरपंच तनुजा साहू बताती है कि गांव के करीब लगभग सभी घरों में भैंस व गाय पालन किया जाता है। हर दिन पांच से सात सौ लीटर दूध का उत्पादन होता है, इसके बाद भी कोई व्यवसाय नहीं करता । घर के लोग ही दूध, दही का उपयोग करते है। दूध की कीमत 35 से 40 रुपए है, लेकिन किसी को इसका लालच नहीं है। इसके कारण एक बूंद भी दूध की िबक्री नहीं की जाती है।
सुरक्षा के लिए गश्त करते हैं युवा
गांव के लोग सुरक्षा को लेकर भी बेहद गंभीर है। शहर के अधिकांश दुकानों में सीसी कैमरा नहीं लगा है, लेकिन यहां के किराने की दुकान में इसे लगाया गया है। किराने की एक बड़ी और तीन छोटी दुकानें है। बड़े दुकान में सुरक्षा के लिहाज से सीसी कैमरा लगाया गया है। छोटी दुकानें घर में ही संचालित है।
थाने में दर्ज नहीं हैं एक भी मामले
नानिकराम साहू बताते हैं कि गांव को आदर्श इसलिए भी माना जाता है क्योंकि अब तक इस गांव के एक भी मामले पुिलस में दर्ज नहीं है। कहीं कोई कहा-सूनी हो जाती है तो गांव के सरपंच और बुजुर्ग सुलह कर लेते है। इसके कारण अब तक थाना जाने की नौबत नहीं आई है। गांव के लोग एक-दूसरे को सम्मान देते है। बड़े बुजुर्गों की सलाह पर गांव चलता है।
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