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बिल जमा किए बड़े ट्रकों के, नंबरों की जांच हुई तो बाइक के निकले

4 वर्ष पहले
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रायपुर. 450 करोड़ रुपए के सेल्स टैक्स घोटाले में आरोपी कारोबारियों ने जितने भी बिल जमा किए, पुलिस को उसकी जांच में कुछ न कुछ बोगस मिल गया। कुछ कारोबारियों ने कुछ कंपनियों के साथ माल के परिवहन के लिए 10 और 14 चक्कों तक के ट्रकों के बिल लगाए और गाड़ियों के नंबर भी दिए। 
 
जब नंबरों की जांच की गई तो पता चला कि सारे नंबर बाइक और स्कूटर के निकले। यही नहीं, कारोबारियों ने जिन कंपनियों से व्यापारिक लेनदेन के बिल रिटर्न में लगाए, पुलिस और वाणिज्यिक कर विभाग को जांच में संबंधित पते पर वह कंपनियां और फैक्ट्रियां ही नहीं मिलीं। सेल्स टैक्स घोटाले की जांच में शामिल इंस्पेक्टर हेमप्रकाश नायक ने बताया कि गिरफ्तार किया गया एक कारोबारी मनोज सिंह जौनपुर का है और गुढियारी में किराए पर रहता है। वह अपना नाम अरविंद सिंह भी लिखता है। उसने मारूति ट्रेडर्स आरंग, खुशी ट्रेडर्स कांपा लोधीपारा और शुभ ट्रेडर्स सिलतरा के नाम से कंपनी का पंजीयन कराया था। इसी नाम से टिन नंबर भी लिया था, जबकि वह घर से कारोबार चला रहा था। 
 
पुलिस की टीम जांच करने के लिए सिलतरा और आरंग गई। वहां आसपास के इलाके में जांच की तो पता चला कि उस नाम से कोई फैक्ट्री नहीं है। आरोपी ने फर्जी पता दिया था। उसकी फैक्ट्री भी नहीं पाई गई। वह फैक्ट्रियों से माल खरीदता था और उसे अपनी कंपनी के नाम से बेचता था। वह एक तरह से ब्रोकर था। 
 
चार एसआईटी से जांच लेट 

ढाई साल से पेडिंग सेलटैक्स घोटाले की जांच को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की थी। एसपी को तीन महीने के भीतर जांच करके रिपोर्ट मांगी थी। उसके बाद इस मामले की आगे की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया था। इसमें सीएसपी सिविल लाइन के अलावा दो टीआई समेत एक दर्जन लोगों को रखा गया था, लेकिन अफसरों का ट्रांसफर हो गया। मामला फिर ठंड बस्ते में चला गया। चौथी बार फिर एसआईटी बनाई गई और मामले की जांच की गई। तब जाकर पहली बार इस मामले में गिरफ्तारी हुई थी। 
 
बैंक से मिले लेनदेन के सबूत 

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बैंकों से कारोबार के नाम पर पैसों का बड़ा लेनदेन किया है। बैंकों से लेनदेन की पूरी डिटेल निकाली गई है। इन बैंक खातों में लाखों का ट्रांजेक्शन दिख रहा है, लेकिन आरोपियों ने इस लेनदेन के अनुरूप टैक्स जमा नहीं किया और माल की बिक्री दिखाकर बाद अपनी कंपनी के नाम से बिल जारी किया और इसे रिटर्न में दिखा दिया। 
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