मैदान के बाहर धोनी ने कायम की दोस्ती की मिसाल, पढ़ें उनकी दोस्ती के किस्से

6 वर्ष पहले
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रांची/रायपुर. महेंद्र सिंह धोनी ने वन-डे और टी-20 की कप्तानी छोड़ दी है। अपने फैसलों से चौंकाने वाले धोनी की जिंदगी उनके दोस्तों के बिना अधूरी है। क्रिकेट के मैदान के बाहर उनकी दोस्ती के कई ऐसे किस्से हैं जिसने दोस्ती की नई मिसाल बनाई। महेंद्र सिंह धोनी पर बनी बायोपिक फिल्म 'एमएस धोनी - द अनटोल्ड स्टोरी' उनके दोस्तों के बारे में दिखाया गया। dainikbhaskar.com धोनी के दोस्ती के किस्से बता रहा है।
 
- 2015 के आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स का एक मैच रायपुर में हुआ था जिसके लिए महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी और बेटी जीवा के साथ पहली बार रायपुर आए थे।
- यहां कई सालों बाद वे अपने एक पुराने दोस्त से भी मिले थे।
- रायपुर पहुंचे धोनी को जब पता चला कि विपिन यहीं रहते हैं तो उन्होंने खुद फोन करके उन्हें नाश्ते पर बुलाया था।
- एकाएक विपिन को विश्वास ही नहीं हुआ था कि इतनी बड़ी हस्ती बन चुके धोनी खुद उन्हें बुला रहे हैं।
 
रेलवे की नौकरी के समय हुई थी दोस्ती
 
- क्रिकेटर बनने से पहले धोनी ने पांच साल तक रेलवे में टिकट चेकर का काम भी किया है।
- इस दौरान रायपुर के विपिन सिंह खड़गपुर में उनके रूम मेट हुआ करते थे।
- विपिन आज भी खड़गपुर रेलवे में टीटी हैं। 2000 से लेकर 2005 तक धोनी भी उनके साथ टीटी थे।
- धोनी झारखंड की तरफ से रणजी खेलते थे। विपिन छत्तीसगढ़ के लिए क्रिकेट खेलते थे। इसलिए रेलवे स्टेशन से लेकर प्रैक्टिस तक वे साथ रहते थे।
 
हेल्प करके जताते नहीं धोनी
 
- धोनी विपिन से एक साल सीनियर थे। जब विपिन ने जॉब ज्वाइन की तो पहले महीने उन्हें पैसे की जरूरत पड़ी।
- पैसों के लिए वे घर फोन कर रहे थे लेकिन धोनी ने रोक दिया और पैसे दे दिए।
- धोनी ने कहा- 'तू चिंता मत कर, सैलरी आते तक मेरे पैसों से काम चला ले।'
- विपिन का कहना है- "रात में घूमना हो या पिक्चर देखना, चाय पीने से लेकर तफरीह करने तक हमारा साथ रहा।"
- "आज वे इतने व्यस्त है कि फैमिली के लिए भी समय निकाल नहीं पाते, लेकिन आज भी वे जमीन से जुड़े हुए हैं।"
- "पिछले कई सालों से हमारा ज्यादा कॉन्टैक्ट नहीं हुआ था, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला मैं यहां हूं, मुझे बुला लिया।"
 
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