विज्ञापन

उग्रवादियों ने कनपटी पर तानी बंदूक, जब इतिहास पर बात की तो ऐसे मिली मदद

Dainik Bhaskar

Jan 30, 2017, 12:17 AM IST

पद्मश्री से सम्मानित छत्तीसगढ़ के पुरातत्वविद् डॉ. अरुण कुमार शर्मा घने जंगलों में खुदाई के दौरान उग्रवादियों की धमकियां और दबाव तक का सामना कर चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से इस तरह के अनुभव शेयर किए और इम्फाल (मणिपुर) के जंगलों में हुई एक घटना का भी प्रमुखता से उल्लेख किया।

पद्मश्री से सम्मानित छत्तीसगढ़ के पुरातत्वविद् डॉ. अरुण कुमार शर्मा घने जंगलों में खुदाई के दौरान उग्रवादियों की धमकियां और दबाव तक का सामना कर चुके हैं। पद्मश्री से सम्मानित छत्तीसगढ़ के पुरातत्वविद् डॉ. अरुण कुमार शर्मा घने जंगलों में खुदाई के दौरान उग्रवादियों की धमकियां और दबाव तक का सामना कर चुके हैं।
  • comment
रायपुर. पद्मश्री से सम्मानित छत्तीसगढ़ के पुरातत्वविद् डॉ. अरुण कुमार शर्मा घने जंगलों में खुदाई के दौरान उग्रवादियों की धमकियां और दबाव तक का सामना कर चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से इस तरह के अनुभव शेयर किए और इम्फाल (मणिपुर) के जंगलों में हुई एक घटना का भी प्रमुखता से उल्लेख किया। ये है मामला...
-उन्होंने बताया कि इम्फाल के पास वे ऐतिहासिक टीलों की खुदाई कर रहे थे, तब 50 उग्रवादी वहां पहुंचे और काम रोकने की धमकी देते हुए मेरी (डा. शर्मा) कनपटी पर पिस्तौल तान दी।
-इसके बावजूद डा. शर्मा ने जब ये कहा कि खुदाई से मिले अवशेषों से आपके ही पूर्वजों के इतिहास को जानने का मौका मिलेगा, तब उग्रवादी न सिर्फ शांत हुए बल्कि खुदाई में मदद भी करने लगे।
ऐतिहासिक टीलों की खुदाई करवानी थी
-पद्मश्री डा. अरुण शर्मा ने 40 सालों में देश के 20 से अधिक राज्यों में ऐतिहासिक स्थलों पर खुदाई का नेतृत्व किया।
-इस दौरान उन्हें झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई तरह की दिक्कतें आईं, लेकिन खुदाई कहीं भी बंद नहीं हुई।
-मणिपुर में 1991 में उनके साथ हुई ऐसी ही एक घटना हुई थी।
-उन्होंने बताया कि इम्फाल से 18 किमी दूर सेकता में कई ऐतिहासिक टीलों की खुदाई करवानी थी।
-यह तब उल्फा और एनएससीएन जैसे उग्रवादी संगठनों के जबर्दस्त प्रभाव में था। उग्रवादियों की अनुमति के बिना यहां कोई एक पत्थर भी निकाल नहीं सकता था।
-जब खुदाई के लिए टीम पहुंची तो स्थानीय मजदूर नहीं मिले। तब डा. शर्मा के साथ गए कुछ लोगों ने खुदाई शुरू की।
-लेकिन इसी दौरान 50 उग्रवादी आ गए और खुदाई बंद करने के लिए कहा।
-डा. शर्मा के मुताबिक उन्होंने काम बंद करने से मना किया तो उग्रवादियों ने कनपटी पर बंदूक तान दी।
-तब उग्रवादियों से कहा -‘मुझे मारने से कुछ हासिल नहीं होगा। खुदाई से प्राप्त अवशेषों से आप अपने पूर्वजों को जान सकेंगे’। यह सुनकर उग्रवादी शांत भी हुए और बाद में मदद भी की।
नाकामी से कभी नहीं रुके
-डॉ. शर्मा के अनुसार खुदाई के लिए अक्सर निर्जन इलाकों में रहना पड़ता था। कई बार असामाजिक तत्व हमला कर चुके हैं।
-मजदूरों के भुगतान के लिए जमा पैसों को लूटने की कोशिश भी हुई। लेकिन इससे कभी परेशानी नहीं आई।
-कई बार खुदाई में कुछ नहीं मिला, फिर भी काम विराम नहीं दिया। जो भी मिला, उसकी विशेषताओं को किताब में लिखते रहे, ताकि आने वाली पीढ़ी को जानकारी मिल सके।

विदेशी विद्वानों के तर्क किए खारिज
-डॉ. शर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई पश्चिमी विद्वानों के मत को उन्होंने नकारा है।
-इतिहासकारों का एक वर्ग यह मानता था कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग बाहर से आए थे। तब डा. शर्मा ने कई तरह की जांच से साबित किया कि ये लोग बाहरी नहीं बल्कि पंजाब और कश्मीर के थे जो नवपाषाण काल में सिंधु घाटी सभ्यता में शामिल हुए।
-इसी तरह कई विदेशी इतिहासकारों ने लिखा है कि भारत में कभी पालतू घोड़ा नहीं था। लेकिन डॉ. शर्मा ने घोड़े के नरकंकाल की जांच से साबित किया कि भारत में प्राचीनकाल से घोड़ा पालतू रहा है।

बीएसपी से एएसआई में
-डॉ. शर्मा ने करियर की शुरुआत भिलाई स्टील प्लांट से की थी। उन्हें इस काम में कुछ नयापन नहीं लगा, इसलिए नौकरी छोड़ दी।
-प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) नागपुर में टेक्निकल असिस्टेंट पद पर ज्वाइन किया।
-इसके बाद सीखने का जुनून शुरू हुआ, जो आज 84 की उम्र में भी बरकरार है। डॉ. शर्मा ने बताया कि उन्हें ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी प्राय: ग्रामीण देते थे।
-छत्तीसगढ़ में बालोद स्थित करकाभाट में महापाषाण काल के टीलों की जानकारी गांववालों ने ही दी थी।
शाकाहारी पर खाने पड़े अंडे
-डॉ. शर्मा के अनुसार उनकी पत्नी कुसुम शर्मा हमेशा साथ रहीं।
-1962 में वे जम्मू के पास खुदाई करवा रहे थे। तब एक हफ्ते तक बर्फबारी हुई थी। रात में टेंट के ऊपर बर्फ जमती थी, जिसे रातभर साफ करते थे।
-वक्त एेसा भी आया कि कैरोसिन खत्म हो गया और दो दिनों तक डॉ. शर्मा और पत्नी भूखे रहे। सब्जी मिली नहीं, इसलिए शाकाहारी होने के बावजूद पत्नी कुसुम को अंडे खाने पड़े।
-इसी तरह, राजस्थान में कुसुम को पानी के लिए कई किमी दूर जाना पड़ता था।
आगे की स्लाइड्स में देखें, फोटो...

Padmashree Arun Sharma Interview
  • comment
Padmashree Arun Sharma Interview
  • comment
X
पद्मश्री से सम्मानित छत्तीसगढ़ के पुरातत्वविद् डॉ. अरुण कुमार शर्मा घने जंगलों में खुदाई के दौरान उग्रवादियों की धमकियां और दबाव तक का सामना कर चुके हैं।पद्मश्री से सम्मानित छत्तीसगढ़ के पुरातत्वविद् डॉ. अरुण कुमार शर्मा घने जंगलों में खुदाई के दौरान उग्रवादियों की धमकियां और दबाव तक का सामना कर चुके हैं।
Padmashree Arun Sharma Interview
Padmashree Arun Sharma Interview
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें