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  • हर वार्ड में एक बार और एक शराब दुकान, समिति बैठक में विधायकों का विरोध

गांवों में शराबबंदी और शहर के 70 वार्डों में 44 शराब दुकानें, 90 बार

5 वर्ष पहले
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रायपुर. सरकारी अमला भले ही छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में शराब पीने की सुविधा देने वाले बार कम करने के लिए नई आबकारी नीति बनाने की तैयारी कर रहा हो, लेकिन मौजूदा हकीकत ये है कि राज्यभर में जितने बार लाइसेंस जारी किए गए हैं, उनमें से एक तिहाई से ज्यादा तो केवल राजधानी में ही हैं।
प्रदेश में बार के लिए आबकारी अमला 267 लाइसेंस जारी कर चुका है। इनमें से 90 बार लाइसेंस रायपुर के लोगों के पास है। रसूखदारों और वीआईपी होटलों की वजह से यह आंकड़ा लगातार इस तरह बढ़ा है कि अब शहर में कोई ऐसी सड़क नहीं बची है जहां आधी रात तक इन बारों में पीने-पिलाने का इंतजाम न हो।

जिले की सलाहकार समिति की बैठक में विरोध के बावजूद आबकारी विभाग ने तय कर लिया है कि राजधानी की एक भी शराब दुकान और बार बंद नहीं किया जाएगा। रायपुर में एक दर्जन से ज्यादा शराब दुकानें ऐसी हैं जिनका हर साल विरोध हो रहा है, लेकिन इनकी जगह तक नहीं बदली गई।
राज्य बनने के बाद से अब तक रायपुर में एक भी बार का लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया है। सूत्रों का अनुसार इसकी वजह यही है कि विभाग शराब दुकानें से आमदनी का टारगेट हर साल इतना बढ़ा रहा है कि दुकानें बंद करना संभव नहीं हो पा रहा है।
जैसे, रायपुर जिले को 2014-15 में 522 करोड़ रुपए की कमाई का टारगेट दिया गया था, जो 2015-16 में बढ़ाकर 574 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इस साल यह 600 करोड़ रुपए से अधिक किया जा सकता है। इसलिए शराब दुकान कम करना संभव नहीं है।
इन दुकानों का विरोध
-राजकुमार कॉलेज के पास शराब दुकान।
-तात्यापारा चौक के पास शराब दुकान।
-जीई रोड में राज टॉकिज के पास।
-तेलीबांधा थाने के पास शराब दुकान।
-लाभांडी में ढाबे के पास दुकान।
-लाखेनगर चौक से लगी शराब दुकान।
-गुढ़ियारी में घनी आबादी के बीच।
-शंकरनगर में खुली शराब दुकान।
-पंडरी बाजार में चल रही दुकान।
-जगदलपुर रोड पर पचपेड़ीनाका दुकान
-रिंग रोड पर चंगोराभाठा के पास।
-फाफाडीह, खमतराई में हाईवे पर।
-हाईवे पर ही बंजारी धाम के आगे।
-टाटीबंध चौक पर स्कूल से कुछ दूर।
छोटा सा क्षेत्र, आधा दर्जन बार
राजधानी में कई इलाके ऐसे हैं, खासकर जयस्तंभ चौक और शारदा चौक जैसे बेहद महत्वपूर्ण चौराहे, जहां से दो सौ मीटर के दायरे में आधा दर्जन होटलें या बार हैं जो शराब पीने की सहूलियत दे रहे हैं। अफसरों का दावा है कि आबकारी विभाग को सबसे ज्यादा राजस्व रायपुर से ही मिलता है। इसलिए इनकी संख्या कम भी नहीं की जा सकती है।
राजधानी में पिछले साल पांच सालों में कुछ शराब कारोबारियों ने अपने लाइसेंस का नवीनीकरण ही नहीं कराया है। इतनी बड़ी संख्या में बार होने के बावजूद नए वित्तीय वर्ष में बार लाइसेंस के लिए आधा दर्जन से ज्यादा आवेदन पेंडिंग हैं। इन्हें अनुमति मिलती है तो 2016-17 में सिर्फ राजधानी में बार का सैकड़ा पार हो सकता है।
जितने आवेदन आते हैं, अधिकांश को लाइसेंस
राजधानी में जिन लोगों के पास शराब का बड़ा कारोबार और दुकानें हैं, उनकी ओर से अगर बार लाइसेंस के लिए अर्जी लगाई गई ,तो उसका मंजूर होना लगभग तय है। हालात ये हैं कि जिले में बार के लिए जितने भी आवेदन आते हैं, अधिकांश को बार लाइसेंस जारी हो ही जाता है। कुछ साल पहले तक किसी भी शॉपिंग मॉल में एक भी बार नहीं था, लेकिन दो साल में तीन शॉपिंग मॉल में भी बड़े बार खुल गए हैं।
सालभर में दर्जनभर छापे
आबकारी नियमों के अनुसार शराब दुकानें रात 10 और बार रात 10.30 बजे बंद हो जाने चाहिए। शराब दुकानें सड़कों पर होने से बंद हो जाती हैं, लेकिन बार आधी रात तक तो चलते ही हैं। कुछ जगह तो रात 2 बजे भी शराब उपलब्ध है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले कई सालों से एक बार भी आबकारी विभाग के अफसरों ने दल-बल के साथ बार की जांच नहीं की है। जानकारों का कहना है विभाग के अफसर केवल शराब दुकानों और ढाबों की जांच करते हैं, बार तो जाते ही नहीं। कई बार इस मामले में संबंध भी आड़े आने की चर्चाएं रहती हैं।

होटलों को छोड़ दिया
शहर के कुछ होटलों में चैरिटी कार्यक्रमों के दौरान शराब परोसी गई। इसकी शिकायत आबकारी विभाग से भी हुई। संबंधित थानों के प्रभारियों ने वहां पहुंचकर पार्टी बंद जरूर करवा दी, लेकिन आबकारी विभाग के अफसरों ने ऐसे होटलों या अनुमति नहीं लेने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
मामले की जांच रिपोर्ट बनाने के नाम पर ही पूरे प्रकरण को रफा-दफा कर दिया गया। विभाग की ओर से इतने सालों में आज तक किसी भी ऐसे होटल पर कार्रवाई नहीं की गई जहां बिना अनुमति के शराब परोसी जा रही थी।

आबादी भी ज्यादा : कलेक्टर
राजधानी में सभी शराब दुकानें और बार निर्धारित मापदंडों के अनुसार खुले हैं। नियमों को नहीं तोड़ा गया है। जहां तक प्रदेश में सबसे ज्यादा दुकान और बार की बात है, यहां की आबादी भी तो ज्यादा है।
ठाकुर राम सिंह, कलेक्टर
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