रायपुर. विजुअली इंपायर्ड कैटेगिरी में देशभर में अव्वल रही अपर्णा को इस उपलब्धि के लिए हाल ही में दिल्ली में राष्ट्रीय संस्था आॅल इंडिया कंफडेरेशन ऑफ द ब्लाइंड ने नेशनल अवॉर्ड से नवाजा। ये अवॉर्ड हासिल करने वाली अपर्णा छत्तीसगढ़ की पहली हस्ती बनी। अपर्णा के पिता दिनेश ने बताया कि नेत्रहीन होने की वजह से बचपन में कई स्कूलों ने अपर्णा को स्कूल में एडमिशन देने तक से मना कर दिया था। पूरी दुनिया में नाम रोशन करने की ज़िद...
- कुछ ने अपर्णा को स्पेशल बच्चों के स्कूल में पढ़ाने की सलाह भी दी। दिनेश ने कई स्कूलों के चक्कर काटे, मशक्कतों के बाद सामान्य स्कूल में एडमिशन कराने कामयाब रहे और अपर्णा को नॉर्मल बच्चों के साथ ही पढ़ाया।
-18 साल पहले 24 जून 1997 को जब घर में बेटी की किलकारी गूंजी तो दिनेश और संगीता सचदेव ने पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटी।
-अपर्णा के मुस्कुराने से लेकर फुसफुसाने तक पर घर में जश्न होता। सब ठीक चल रहा था। अपर्णा बोलना सीख रही थी।
-जब दिनेश और संगीता उसे कुछ देखने के लिए कहते या इशारा करते तो वो खामोश ही रहती। न उस ओर देखती, न कोई प्रतिक्रिया देती।
-तीन महीने बाद जिस दिन डॉक्टर ने बताया कि अपर्णा को लाइलाज बीमारी रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा है और वो देख नहीं सकती उस दिन दिनेश और संगीता धक्क रह गए।
-यकीन ही नहीं हुआ। खूब रोए, पूरी रात आंखों में आंसू लिए काटी। तय किया कि नई सुबह के साथ नई जिंदगी शुरू करेंगे। न राेएंगे न अपर्णा को रोने देंगे।
-जिद की अपर्णा को इतना काबिल बनाने की कि वो अपना हर काम खुद कर सके।
सामान्य बच्चों की तरह बड़े सपने देख सके और उन्हें पूरा कर सके। होश संभालने के बाद एक ज़िद अपर्णा ने भी की। माता-पिता का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने की ज़िद। किया भी। साल 2015 में सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में अपर्णा ने जनरल कैटेगिरी में पूरे राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया। 97.7 परसेंट हासिल किए।
पढ़ाई स्पेशल सॉफ्टवेयर से
आपकी और हमारी तरह अपर्णा भी वॉट्सएप चलाती है। दोस्तों से चैट करती है। स्पेशल स्पीच सॉफ्टवेयर के जरिए मोबाइल और लैपटॉप यूज करती है। इसी के जरिए पढ़ती भी है। सोशल साइट्स पर समय बर्बाद करना अपर्णा को पसंद नहीं। मूड फ्रेश करने गाने सुनती हैं।
लुई ब्रेल की याद में अवॉर्डब्रेल लिपि बनाने के लिये विश्व प्रसिद्ध लुई ब्रेल की याद में ये अवॉर्ड ऐसी शख्सियत को दिया जाता है जो दृष्टिहीन होने के बावजूद हुनर के दम पर दुनिया में जगमगा रहे हैं। बच्ची को अवॉर्ड लेता देख मां संगीता की आंखें फिर छलकीं, गर्व से।
बेटी ने सच किए ख्वाब
पिता दिनेश सचदेव ने बताया कि हमने वो दौर भी देखा है जब स्कूलों ने कहा कि इनके लिए स्पेशल स्कूल होते हैं वहां जाइए। अपनों ने भी चुभने वाले शब्द कहे। मगर हम टूटे नहीं। बेटी का साथ दिया। बेटी ने भी नामुमकिन लगने वाले ख्वाब पूरे किए। हमें उस पर नाज है।
डीयू ने भेजा लंदन
वर्तमान में अपर्णा देश के टॉप कॉलेजों में शुमार लेडी श्री राम कॉलेज दिल्ली से इंग्लिश में बीए ऑनर्स कर रही है। इस कॉलेज में एडमिशन के लिए मिनिमम कटऑफ ही 95 से 100 के बीच होता है। अपर्णा ने यहां आरक्षण नहीं बल्कि परसेंट के दम पर जनरल कैटेगिरी से एडमिशन लिया है। 17 से 25 जनवरी तक लंदन में थीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने सात दिवसीय स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अपर्णा सहित चार स्पेशल किड्स को किंग्स कॉलेज ऑफ लंदन भेजा था।
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