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आंखों की रोशनी लौटी, कर रहा दूसरों की मदद
दतरेंगा के एक किशोर की आंखों का इलाज करवाया कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि के स्टाफ ने
विश्वविद्यालयके एक कार्यक्रम में मुन्ना ट्रेनिंग के लिए आया था। वह आर्थिक रुप से कमजोर है। वह पढ़ाई की हसरत रखता था, उसने इलाज के लिए मदद मांगी। हमने मिलकर कोशिश की और अब उसकी आंखें ठीक हो गई। उसकी इच्छाशक्ति को देखते हुए हमने उसे ऐसे ही दूसरे बच्चों को तलाशने का काम दिया है ताकि औरों की भी मदद की जा सके। डॉ़.सच्चिदानंद जोशी, कुलपति,कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर
तीन गांव में मिले पांच किशोर
मुन्नाकी आंखों का इलाज होने के बाद विश्वविद्यालय ने उसे नजदीकी गांव में दृष्टि दोष से पीड़ित और किशाेरों का पता लगाने के लिए कहा था। वह पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे किशोरों को तलाशने का काम भी कर रहा है। पिछले एक साल में उसने पांच ऐसे बच्चों को विश्वविद्यालय तक पहुंचाया है।
पढ़ाई के लिए संघर्ष
मुन्ना के पिता का देहांत हो चुका है। घर में मां के अलावा पांच भाई और एक बहन है। घर का खर्च चलाने के लिए मुन्ना अपने भाइयों के साथ ईंट भट्ठे में काम करता है। पढ़ाई की खर्च के लिए वह होटल में काम कर पैसाें की व्यवस्था करता है।
शेखर झा >8982224445
दतरेंगानिवासी मुन्ना मारकंडे महज 14 साल की उम्र में एक लक्ष्य निर्धारित कर आस-पास के छह गावों के लिए निकलता है। एक खास मकसद है अपने हमउम्र उन किशाेरों की तलाश करना जो दृष्टिदोष से पीड़ित हैं लेकिन उनमें पढ़ने की इच्छा है। दरअसल चार साल पहले वर्ष 2011 में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुन्ना ने कुलपति समेत अन्य प्राध्यापकों को बताया कि वह दृष्टिदोष से पीड़ित है लेकिन पढ़ना चाहता है। उसकी ललक को देखते हुए कुलपति और सहयोगियों ने व्यक्तिगत रूप से पैसे इकट्ठा किए और एक निजी अस्पताल में उसका इलाज कराया। ठीक होने के बाद मुन्ना शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दतरेंगा में अध्ययनरत है। इलाज के बाद छठवीं कक्षा में उसे 92 फीसदी और सातवीं में 97 फीसदी अंक मिले।
आंखों की रोशनी लौटने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुन्ना को दतरेंगा, काठाडीह, कांदुल, घुघुआ, खुरमुड़ा और डोमा गांव में जाकर उसके जैसे बच्चों की तलाश का जिम्मा दिया है। उसने अब तक पांच ऐसे लोगों की तलाश कर, उनके नाम सुझाए हैं। इनके इलाज को लेकर कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी का कहना है कि शासन से मदद दिलवाएंगे। साथ ही विश्वविद्यालय अपने स्तर पर ऐसे बच्चों की मदद करता रहेगा। विवि के छात्रों की एक टीम बनाई जा रही है जो मुन्ना के साथ मिलकर काम करेगी।