- Hindi News
- रॉन्ग नंबर से मिले मिस्टर राइट, लव स्टोरी सीरिज में आज पढ़िए भावना और मनीष की प्रेम कहानी
रॉन्ग नंबर से मिले मिस्टर राइट, लव स्टोरी सीरिज में आज पढ़िए भावना और मनीष की प्रेम कहानी
जगह:राजनांदगांव
किसी अाम लड़की की तरह मेरी जिंदगी भी चल रही थी। सुबह उठना घर के काम निबटाना कॉलेज जाना सहेलियों के साथ वक्त बिताना। मुझे क्या पता था कि एक बड़ा बदलाव मेरा इंतजार कर रहा है। एक दिन घर के काम बिजी थी। फोन की घंटी बजी। फोन उठाया, सामने से आवाज आई हेलो जी नमस्ते मैं बालाघाट से मनीष बोल रहा हूं। रमेश से बात करनी है। मैंने रॉन्ग नंबर कह कर फोन पटक दिया।
ये सिलसिला यहीं नहीं रुका। अब हर रोज फोन आने लगा। इत्तफाक भी ऐसा कि जब मैं फोन के आस-पास होती तभी फोन बजता। शायद एक दिल मीलों दूर से दूसरे दिल की मौजूदगी का अंदाजा लगा रहा था। जब हद हो गई तो मैंने नाराज होकर पूछा आखिर तुम रोज क्यों फोन करते हो? आपसे बात करना अच्छा लगता है... ये सुनकर मैंने तल्ख अंदाज में फिर डांटा, पर वो नहीं माने। फिर हर रोज फोन आने लगे और मैं भी बातें करनी लगी। एक दिन उन्होंने कहा कि हमे मिलना चाहिए। मैंने मना कर दिया। कहा- घर पर किसी को पता चले तो भूचाल जाता। उनकी लाख मिन्नतों के बाद मेरा दिल पसीजा। छिपते-छिपाते हम मिले। कपड़ों से एक-दूसरे को पहचाना। मुलाकातें यूं हीं चलती रहीं।
एक दिन उन्होंने मुझसे कहा मैं अपनी सारी जिंदगी तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूं। मैं बोली मैं राजपूत परिवार से हूं। मेरी और दो बहने हैं। घरवाले राजी नहीं होंगे। वो मेरी मम्मी से आकर मिले। मम्मी ने बात समझी जरूर पर बात बनी नहीं। अब दोनों के ही घरवालों ने रिश्ते तलाशने शुरू कर दिए। मेरा भी रिश्ता तय हो गया। प्यार की खूबसूरत सी कहानी अाखिरी सांसें गिन रही थीं। मनीष और मैं दोनों तड़प रहे थे। दिमाग ने हार मान ली। दिल बोला भाग चलो। और दुर्ग आकर हमने शादी कर ली। शाम तक अपने-अपने घर लौट आए। प्यार के हसीन सपनों को पंख लग गए, पर ये क्या दूसरे ही दिन किसी और से सगाई और शादी की तारीख पक्की कर दी गई। घर से बाहर निकलना बंद कर दिया गया।
हम दोनों ही समाज और परिवार के आगे बेबस होते चले गए। एक दिन पंख खोलकर हमने उड़ान भरी। डोंगरगढ़ चले गए। घर पर भाइयों ने हंगामा मचा दिया। मरने-मारने की बातें होने लगीं। हम बचने के लिए मनीष के बचपन के दोस्त के घर इंदौर चले गए। पैसे थे नहीं मुश्किल हालातों में हम रहे। मेरी एक डायरी मेरे भाइयों के हाथ लग गई। उसमें इंदौर वाले इस फ्रैंड का भी नंबर था। धमकाने पर उसने हमारा पता बता दिया। हम वहां से निकले और हमेशा के लिए रायपुर गए। यहां बड़ी मुश्किलों से मेरे भाइयों और इनके बीच सुलह हुई।
मेरे परिवार वालों ने तय किया कि हमसे कोई रिश्ता नहीं रखेंगे। चूंकि मैं एलएलबी की स्टूडेंट थी तो मेरे इम्तहान भी थे। सारी दिक्कतों को एक तरफ रखकर मनीष ने मेरी पढ़ाई पूरी करवाई। मेरे घर वालों से हर तरह का अपमान झेलने के बावजूद ये उनकी मुझसे भी ज्यादा इज्जत करते हैं। मां भी कई बार कहती है ऐसा दामाद तो हमें दूसरी बेटियों की अरेंज मैरिज में भी नहीं मिला। हमारी शादी को 10 साल हो चुके हैं। बड़ी बेटी का नाम श्रिया और बेटे का शौर्य है। अगर आने वाले जन्मों में भी मौका मिले तो इनके लिए सबकुछ छोड़ दूंगी।
भावना हुम्नेकर, माना रायपुर
चोरी-छिपे की शादी, डायरी से खुला राज
शेयर करें लव स्टोरी
अगरआपने अपना प्यार हासिल करने के लिए की थी जी तोड़ कोशिशें। आपके सामने भी रखी गई थी शर्त कुछ बनकर दिखाने और दुल्हनिया ले जाने की तो अपने जज्बातों को हमसे 8103374120 या citybhaskarraipur@gmail.com पर साझा करें।