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ऊंट पर आई थी बारात, दस हजार में हो गई थी शादी
त1961 की है, घर के लोगों ने रिश्ता तय किया और हमारी शादी हो गई। तब हमने एक-दूसरे को देखा तक नहीं था, अब देखे बिना चैन नहीं मिलता। इतना कहकर 74 साल के बिशनलाल अग्रवाल अौर 72 साल की प्रेमलता शादी की यादों में खो जाते हैं। बिशनलाल कहते हैं, प्रेमलता राजस्थान के चिड़ावा (झुंझनू) में रहती थी। शान शौकत से ऊंट पर बारात लेकर गया था। 10 हजार रुपए में पूरी शादी हो गई थी। 45 साल पहले राजस्थान छोड़ रायपुर आए और यहीं के होकर रह गए। तब हम ज्वाइंट फैमिली थे। अलग होने के बाद खुद का कारोबार शुरू किया, आज 3 राइस मिल और कई दूसरे कारोबार हैं। सब बच्चे संभालते हैं। ऐसा कई बार हुआ जब मेरी हिम्मत टूटी तब प|ी ने हौसला बढ़ाया। हर कदम पर वो मेरे साथ रही। घर की पूरी जिम्मेदारी प्रेमलता ने संभाली, इसलिए मैं कारोबार फैला सका।
मेलेमें हुए गुम, मिले संगम में
बिशनलालअग्रवाल कहते हैं, एक बार कुंभ के मेले में प्रेमलता लाखों की भीड़ में गुम हो गई थी। मैंने हर जगह ढूंढ़ने की कोशिश की। घंटों ढूंढ़ता रहा, फिर भी ये कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। लोगों की सलाह पर मेला समिति के पास गुमशुदा एनाउंसमेंट के लिए जा ही रहा था कि संगम तट पर प्रेमलता मिल गई। इतना खुश था मानो नई जिंदगी मिल गई हो। प्रेमलता कहती हैं, मैंने संगम में प्रार्थना की थी कि तू सबको मिलाती है, हमको भी तू ही मिलाएगी और हम दोनों फिर मिल गए।
नामवाला कमरबंद बेस्ट गिफ्ट
प्रेमलताबताती हैं, इन्होंने अपना नाम लिखा कमरबंद गिफ्ट किया था, वो अब तक का बेस्ट गिफ्ट है। मैंने उसे संभालकर रखा है।
golden jubilee
अग्रवालदंपती 54 सालों से साथ, हर काम करते हैं एक-दूसरे की सलाह से