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भागती-दौड़ती जिंदगी में कविताओं से मिलता है सुकून : प्रो. राका

7 वर्ष पहले
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जिसेदेखो वो भाग रहा है, दौड़ रहा है। सूकुन कहीं नहीं है। कविताएं ही हैं जो सुकून पहुंचाती हैं। ये कहा प्रो. राका डे ने। मौका था उन्हीं की लिखी किताब के विमोचन का। सिविल लाइंस स्थित वृंदावन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के कई साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। प्रो. डे ने यूरोपीय कवियों की 50 से भी ज्यादा कविताओं को हिंदी में अनुवाद करके पेश किया है।

उन्होंने बताया कि जैसे छंद और अलंकार वगैरह भारत में पसंद किए जाते हैं उनके अनुसार ही थोड़े बदलाव कविताओं में किए गए हैं जो लोगों को पसंद आएगा। कार्यक्रम में मुख्यअतिथि पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. एसके पांडे रहे। प्रो. सीएम मुखर्जी भी कार्यक्रम में बतौर अतिथि मौजूद रहे। इन्हीं मेहमानों ने किताब का विमोचन किया। स्टेट रिर्सोस सेंटर के डायरेक्टर तुहिन देब ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस किताब में सन् 1770 से 1963 तक की अंग्रेजी रचनाएं शामिल हैं, जो प्रकृति, प्रेम और समाज जैसे विषयों पर आधारित हैं। किताब में इंगलैंड के छायावादी कवि विलियम वडवर्थ की 10, सैम्युल टेलर की 4 और लॉर्ड बायरन की 5 कविताओं के अलावा जॉन किट्स, टीवी सेली की कविताएं शामिल हैं। अमेरिकी सक्षमतावादी कवियों में आरडब्लू एमरशॉन, वाल्ट विथमैन अन्य शामिल हैं।

वृंदावन में आयोजित पुस्तक विमोचन के दौरान अपनी बात रखते कविगण।