कलेक्टर से नहीं ले रहे अनुमति
कलेक्टर से नहीं ले रहे अनुमति
जिनजिलों के लिए आदेश हुआ है, वहां के खेल अधिकारियों को विभागीय बजट खर्च करने के लिए कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इस पर तो खेल विभाग कार्रवाई कर रहा है और ही वित्त विभाग।
पदोन्नतिनहीं देने से हो रही गड़बड़ी
प्रदेशके सभी जिलों में खेल अधिकारी और वरिष्ठ खेल अधिकारियों को सहायक संचालक के पद का प्रभार दिया गया है। मध्य प्रदेश के समय से जिस पद पर नियुक्ति हुई थी, उसी पर आज तक हैं। इन्हें पदोन्नति नहीं मिली है। इनमें से अधिकतर पदोन्नति के बाद सेकंड क्लास ऑफिसर की श्रेणी में जाएंगे।
सातजिलों के लिए नहीं हुआ आदेश
राजपत्रितअधिकारी द्वारा ही आहरण के अधिकार को लेकर खेल विभाग ने 27 अक्टूबर 2014 को 13 जिलों के लिए आदेश जारी किया था। हालांकि सात जिलों में अभी भी आदेश नहीं पहुंचा है। इनमें रायपुर समेत बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी, जगदलपुर और रायगढ़ हैं। इन जिलों में भी अराजपत्रित अधिकारी पैसे का आहरण कर रहे हैं।
आहरणका नहीं दिया गया था अधिकार
वित्तएवं योजना विभाग ने वर्ष 2003 में एक आदेश जारी किया था। इसके अनुसार आहरण और संवितरण का अधिकार सिर्फ राजपत्रित अधिकारियों को है। किसी भी अराजपत्रित अधिकारी को कार्यालय प्रमुख घोषित नहीं किया जा सकता है। अगर पूर्व में किसी अराजपत्रित अधिकारी को कार्यालय प्रमुख बनाया गया है तो इसकी समीक्षा कर पुनरीक्षित आदेश जारी किया जाना अनिवार्य है। विशिष्ट प्रकरण में अपवाद स्वरूप अन्यथा स्वीकृति आवश्यक हो तो इसके लिए वित्त विभाग से पूर्व सहमति अनिवार्य रूप से लेना है।