दो साल में भी भवन मिला स्टाफ
प्रदेशमें शुरू किए गए मुख्यमंत्री शहरी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र अधिकतर जगह कागजों पर ही चल रहे हैं। अक्टूबर 2012 में योजना की शुरुआत करते समय कहा गया था कि जिले में 103 केंद्रों की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक केंद्र के लिए एएनएम की भर्ती होगी। सप्ताह में प्रत्येक गुरुवार को विशेषज्ञों की टीम द्वारा ओपीडी लगाकर जांच की जाएगी और नि:शुल्क दवा वितरण होगा। बाकी दिनों में एएनएम घर-घर जाकर टीकाकरण और काउंसलिंग करेंगी। सारी कवायद की जिम्मेदारी सिविल सर्जन को सौंपी गई। शासन ने आनन-फानन में घोषणा तो कर दी लेकिन संसाधनों पर ध्यान नहीं दिया। नतीजा योजना फेल होने की कगार पर पहुंच गई। दो साल बाद भी केवल 60 केंद्र शुरू किए जा सके हैं। केंद्र के लिए जगह नगर निगम को मुहैया करवानी थी लेकिन नहीं हो सकी। योजना प्रभारी स्वतंत्र रहंगडालकर ने बताया कि जगह के लिए निगम को कई बार पत्र भेज चुके हैं।
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^ एएनएम चली जाती हैं
जहांकेंद्र नहीं खुले हैं, वहां आंगनवाड़ी में संचालित कर रहे हैं। एएनएम की भर्ती संविदा पर होती है, दूसरी जगह नियमित भर्ती हो जाने पर वे चली जाती हैं। डॉ.बीके दास, सिविलसर्जन, रायपुर
^ व्यवस्था कर रहे हैं
केंद्रचलाने के लिए सामुदायिक भवन दिए गए हैं। नए भवन का निर्माण नहीं कर सकते, धीरे-धीरे व्यवस्था कर रहे हैं। अवनीशकुमार शरण, आयुक्त,नगर निगम
जोन क्र.- 3 कार्यालय