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कोशिश हो रही है कि अपने-अपने गुट के लोगों को
कोशिश हो रही है कि अपने-अपने गुट के लोगों को अधिक से अधिक टिकट दिलवाएं। इससे उनकी प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है।
प्रतिष्ठा बचाए रखने के लिए हो रही मशक्कत
नगरीय निकाय चुनाव के लिए प्रत्याशी तय करने के लिए दोनों प्रमुख पार्टियां मशक्कत कर रही हैं। भाजपा की ओर से कोशिश हो रही है कि 12 दिसंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के बाद ही नाम घोषित हों। वहीं कांग्रेस में नाम तय करने से पहले एक बार फिर गुटबाजी खुलकर सामने गई है। निकायों के लिए अध्यक्ष महापौर के नाम को लेकर जब चर्चा शुरू हुई तो आरोप-प्रत्यारोप लगने लगे। कुछ वरिष्ठों ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। रायपुर से लेकर दिल्ली तक मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष को घेरने की कोशिश होने लगी। दरअसल कोशिश हो रही है कि अपने-अपने गुट के लोगों को अधिक से अधिक टिकट दिलवाएं। इससे उनकी प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। जिस गुट के अधिक लोगों को टिकट मिल गया, उनकी सियासी पूछपरख बढ़ जाएगी। ऐसे में नाम तय होने के बाद भी विरोध की पूरी संभावना है। {खबरची