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एम्स के मेडिकल स्टोर से मरीजों को जबरदस्ती दिया जा रहा ओआरएस
एम्समें इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। परिसर में 65.30 प्रतिशत रियायत देकर जो जेनरिक दवाइयां बेची जा रही है, उनके साथ मरीजों को ओआरएस के पैकेट भी थमा दिए जाते हैं। बहाना होता है, खुदरा (चिल्हर) पैसा होना। डीबी स्टार टीम ने पड़ताल के दौरान देखा कि यहां आने वाले 600 मरीजों में से ज्यादातर यहीं से दवा खरीदते हैं। यहां रियायती दर पर दवा उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी सीमा एजेंसी को दी गई है।
स्टोर संचालक की इस मनमानी से सबसे अधिक परेशानी कम पढ़े-लिखे मरीजों को हो रही है। चाहे बीमारी कोई भी हो, ओआरएस देने पर उन्हें लगता है कि डॉक्टर की पर्ची में यह दवा भी लिखी है। जबरदस्ती रोजाना 10 हजार रुपए से अधिक के ओआरएस बेचे जा रहे हैं। इसे लेकर स्टोर के सुपरवाइजर का कहना है कि जब लोग दोबारा आएंगे तो उनसे पैकेट वापस ले लेंगे। वहीं एम्स प्रबंधन का कहना है कि उन्हें इस गड़बड़ी की जानकारी नहीं। जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।
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लोग समझते हैं, डॉक्टर ने यह दवा भी लिखी है
अनपढ़या कम पढ़े लिखे मरीज ओआरएस को भी प्रिस्क्रिप्शन में लिखी दवा समझ लेते हैं। पड़ताल के दौरान टीम ने देखा कि रायपुरा से आए मरीज गोपाल ने मेडिकल स्टोर से दवा ली। 71 रुपए का बताने पर गोपाल ने 100 रुपए का नोट दिया। इस पर संचालक ने दवा के साथ ओआरएस के तीन पैकेट भी दे दिए। गोपाल से कार्ड दिखाने के लिए कहा तो उसमें ओआरएस नहीं लिखा था। पूछने पर कहने लगे, डॉक्टर ने शायद यह दवा भी पर्ची में लिखी है।
बीमारी कोई भी हो दवा लेने वालों को आप ओआरएस के पैकेट दे रहे हैं?
हां,चिल्हर नहीं होेने पर ओआरएस दे रहे हैं।
लेकिनओआरएस हर किसी के काम का नहीं है?
ठीकहै, जब दोबारा आएंगे तो पैकेट वापस ले लेंगे।
कीमतभी अलग है, किसी से 6 तो किसी से 9 रुपए ले रहे हैं?
जितनीचिल्हर कम होती है, उतने की दे देते हैं। वैसे भी दवाइयों में 65.30 प्रतिशत की छूट दी जा रही है, किसी को शिकायत नहीं होनी चािहए।
सारीदवाइयां भी नहीं मिल रही हैं?
आजही 36 ब्रांड की नई दवाइयां आई हैं।
लाख होता है यह आंकड़ा हर महीने
हजार रुपए की औसतन रोजाना जबरदस्ती दे रहे ओआरएस
मरीज रोजाना आते हैं ओपीडी में
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