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लफ्जों के अद्‌भुत संगम में सुर-ताल की मधुर झंकार

7 वर्ष पहले
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देशके नामी लेखको, कवियो और रंगकर्मियों की मौजूदगी में शुक्रवार को रायपुर साहित्य महोत्सव शुरू हुआ। महोत्सव में तीन दिन तक साहित्य से जुड़े अलग-अलग विषयों पर चर्चा की जानी है। कार्यक्रम स्थल पर गजानन माधव मुक्तिबोध मंडप, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी मंडल, मुकुटधर पाण्डेय मंडप और हबीब तनवीर मंडप बनाए गए हैं। जहां अलग अलग पैनल में साहित्य के अलग अलग पहलुओं और बदलते स्वरूप पर दिनभर चर्चा चलती रही। पुरखौती मुक्तांगन की खूबसूरती ने कार्यक्रम में रस घोला।

साहित्यकारों की माैजूदगी में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने महोत्सव का उद्‌घाटन किया। इस मौके पर जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एन. बैजेन्द्र कुमार, प्रमुख सचिव अमन कुमार सिंह, जनसम्पर्क विभाग के संचालक रजत कुमार उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने देश के नामी साहित्यकारों का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य मनुष्य की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है। राज्य की साहित्यिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों के बारे में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ मेहनतकश, ईमानदार और सहज-सरल स्वभाव के लोगों की धरती है।

हिंदीसाहित्य की किताबें

महोत्सवमें लगे बुक फेयर में अलग-अलग प्रकाशन के स्टॉल में हिंदी के नामी लेखकों और कवियों की रचनाएं उपलब्ध हैं। महोत्सव में आए स्कूल स्टूडेंट्स से लेकर साहित्य में रुचि रखने वाले लोग तक यहां उपलब्ध किताबों में दिलचस्पी लेते दिखे।

स्टेजके बिना दी प्रस्तुति

जनसंपर्कविभाग ने पहले साहित्य महोत्सव के बाद मुंबई के कलाकारों का कार्यक्रम तय किया था। हाल ही में हुए नक्सली हमले के बाद यह कार्यक्रम रद्द हुआ और शाम के समय छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों का कार्यक्रम होना तय हुआ। महोत्सव के दो दिन पहले तय किया गया कि इन कलाकारों की प्रस्तुति शाम को नहीं दोपहर को होगी। महोत्सव शुरू होने के बाद यह कहा गया कि केवल खैरागढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों की प्रस्तुति स्टेज पर साउंड लाइट के साथ होगी। राज्य के लगभग 15 कलाकारों के दल महोत्सव में शामिल होने थे।

रविंद्रनाथ टैगोर की रचना पर खैरागढ़ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने बैले नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुति को लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।

नहींआए निदा फाजली

महोत्सवमें निदा फाजली के शामिल होने की बात शुरू से कही जा