साल की शुरुआत में ही सामने आए 14 मामले
6 गुना ताकत से सक्रिय एच1एन1
तीन साल पहले स्वाइन फ्लू को लक्षणों से ही पहचाना जा सकता था, लेकिन अब यह वायरस हर मौसम में गिरगिट की तरह रंग बदल रहा है। पहले जहां इसकी दवा सिर्फ एक सप्ताह दी जाती थी वहीं अब दवाओं का डोज डेढ़ से दो महीने तक देना पड़ रहा है।
स्वाइन फ्लू बीमारी के वायरस में म्यूटेशन बढ़ता जा रहा है। डॉक्टर तो यहां तक कह रहे हैं कि इसके लक्षण भी पहले जितने स्पष्ट थे उतने अब नहीं हैं। खतरे को इस तरह भी समझा जा सकता है कि महज पांच साल पहले जहां टेमीफ्लू दवा का डोज सिर्फ सात या आठ दिन दिया जाता था वही कोर्स ड्यूरेशन अब बढ़कर डेढ़ से दो महीने तक जा पहुंचा है यानी वायरस छह से आठ गुना ज्यादा ताकतवर हो चुका है। >शेषपेज 2