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- मुद्दों पर सहयोग करने का आरोप हमेशा से दोनों पार्टियां एक दूसरे पर लगाती रही हैं।
मुद्दों पर सहयोग करने का आरोप हमेशा से दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर लगाती रही हैं।
मुद्दों पर सहयोग करने का आरोप हमेशा से दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर लगाती रही हैं।
यह खींचतान तो पूरे कार्यकाल के लिए है
रायपुर नगर निगम में इस बार सत्ता का समीकरण बदला हुआ है। भले ही महापौर कांग्रेस के हैं लेकिन पार्षदों की संख्या के हिसाब से भाजपा आगे है। ऐसे में कांग्रेस काे पहले से पता है कि कई मुद्दों पर उन्हें बैकफुट पर आना होगा। इसके बाद भी निगम में सियासी हवा लगातार बदल रही है। भाजपा पार्षदों ने जोन क्र.-2 में बैठक रखी तो समय देने के बाद भी महापौर इसमें शामिल नहीं हुए। ऐसे में विरोध शुरू हो गया। रणनीति बनी कि अब महापौर की किसी भी बैठक में ये भाजपा पार्षद शामिल नहीं होंगे। इस बैठक में कांग्रेसी पार्षद भी थे। वे डैमेज कंट्रोल में लगे रहे। हालांकि यह हर बार की कहानी है। मुद्दों पर सहयोग करने का आरोप हमेशा से दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर लगाती रही हैं। यह खींचतान तो पूरे पांच साल के कार्यकाल में चलती रहती है। भले ही विकास के मुद्दे पीछे ही क्यों छूट जाएं। {खबरची