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रिपोर्ट आने तक बस टेमीफ्लू का सहारा

6 वर्ष पहले
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स्वाइनफ्लू के संदिग्ध मरीज की पहचान के लिए अब भी चिकित्सकों को नई दिल्ली स्थित लैब की रिपोर्ट के भरोसे रहना पड़ रहा है। मरीज में बीमारी के लक्षण दिखने के बाद उसके सैंपल लेकर नई दिल्ली टेस्ट के लिए भेजे जाते हैं। हालांकि संदिग्ध मरीजों को भी टेमीफ्लू देना शुरू कर दिया जाता है और रिपोर्ट एक सप्ताह बाद मिल पाती है, लेकिन इस दौरान वायरस की अति सक्रियता की वजह से मरीज की हालत बिगड़ने के साथ-साथ उसकी मृत्यु तक हो जाती है। एक्सपर्ट के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चे और 65 साल से अधिक के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं इस बीमारी से सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए उन्हें सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इसके अलावा जिन लोगाें को फेफड़ों, किडनी, दिल या डायबिटीज की बीमारी है, उन्हें संबंधित लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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